देवी की अनंत ज्योति
Rishimukh Hindi|October 2020
धर्मशाला से करीब ५० किलोमीटर दूर हिमाचल के शिवालिक की गोद में ज्वाला जीष्कांगड़ा जगह उपस्थित है। ज्वाला जी या ज्वालामुखी ऐसे ही अनूठे स्थानों में से एक हैं, जहां आग की लपटें जलती हुई रहती है , कहा से यह ज्ञात नहीं है जिस समय से यह जाना जाता है । नौ लपटें जवरात्रिके नौ देवी के रूप को दर्शाती हैं। ये लपटें सदियों से जल रही हैं, बिना रोके एवम बिना किसी ईधन के -देवी की शाश्वत ज्वाला।
प्रदीप्त प्रधान

हममें से बहुत से लोग जानते हैं कि शक्तिपीठ वे पवित्र स्थान या ऊर्जा केंद्र हैं जहां देवी निवास करती हैं। ऐसा ही एक शक्तिपीठ धर्मशाला से करीब ५० किलोमीटर दूर हिमाचल के शिवालिक की गोद में 'ज्वाला जी' कांगड़ा है। ज्वाला जी या ज्वालामुखी ऐसे ही अनूठे स्थानों में से एक हैं, जहां आग की लपटें जलती रहती हैं, कैसे यह अबतक ज्ञात नहीं हुआ है। ऐसी जगहें भारत के बाहर, नेपाल में और अजरबेजान के बाकू में हैं।

अग्नि लगभग हर धर्म के लिए विश्वास और पूजा का केंद्र रही हैय पारसियों के साथ अन्य धर्मो में अग्नि की पूजा भगवान को खुश करने के लिए एक वस्तु के रूप में पहचानी जाति है। यही कारण है कि कुछ मोमबत्तियां जलाते हैं, कुछ दीया जलाते हैं और कुछ अग्नि के लिए बलिदान प्रस्तुत करते है। शाश्वत अग्नि का विचार भी इसलिए 'अखंड दीप' की अवधारणा और यरूशलेम में पवित्र सेपुलचर के चर्च' की सदा जलती हुई लौ के साथ धर्मों में आता है। ज्वाला जी एक ऐसी जगह है जहां नौ ज्योति हैं जो आग की लपटों के आधार पर नीले रंग से जलती हैं। नौ लपटें 'नवरात्रि की नौ देवियों को दर्शाती हैं। ये लपटें सदियों से जल रही हैं, बिना किसी ईधन के बिना रुके -देवी की शाश्वत ज्वाला।

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देवी की अनंत ज्योति

धर्मशाला से करीब ५० किलोमीटर दूर हिमाचल के शिवालिक की गोद में ज्वाला जीष्कांगड़ा जगह उपस्थित है। ज्वाला जी या ज्वालामुखी ऐसे ही अनूठे स्थानों में से एक हैं, जहां आग की लपटें जलती हुई रहती है , कहा से यह ज्ञात नहीं है जिस समय से यह जाना जाता है । नौ लपटें जवरात्रिके नौ देवी के रूप को दर्शाती हैं। ये लपटें सदियों से जल रही हैं, बिना रोके एवम बिना किसी ईधन के -देवी की शाश्वत ज्वाला।

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