अन्नपूर्णा पूर्णता से पूर्णता की ओर
Rishimukh Hindi|October 2020
एक बार कैलाश पर्वत पर पार्वती जी ने शिवजी को पासों का खेल खेलने के लिए आमंत्रित किया। जैसे एक पिता अपने बच्चे को खुश करने के लिए उसके साथ खेलता है, शिवजी मुस्कुराए और तैयार हो गए।
भानुमति नरसिंहन

पार्वती जी ने खेल के नियम बताएं और जुआ खेलने का विकल्प चुना। उन्होंने पहले अपने गहने दांव पर लगाएं और शिव जी ने अपना भाला, शिवजी हार गए, तब शिवजी ने अपना सर्प दाँव पर लगाया और फिर से हार गए, फिर वह लगातार कभी गंगा, कभी भस्म, रुद्राक्ष माला दांव पर लगाते रहे३३. और हारते रहे। कुछ दौर के बाद उनके पास दांव पर लगाने के लिए कुछ नहीं बचा और खेल समाप्त हो गया और पूर्णत: बेफिक्र होकर वह अपनी समाधि लगा कर बैठ गए।

भगवान विष्णु यह सब खेल देख रहे थे, वह शिवजी के पास गए और बोले कि पार्वती जी को फिर से खेल के लिए आमंत्रित करो। इस बार मैं आपके साथ रहूंगा, देखते हैं क्या होता है। शिवजी मुस्कुराए और मान गए। पार्वती जी शिवजी के दोबारा खेल में रुचि के प्रस्ताव से आश्चर्यचकित हुई और खेलने के लिए बैठ गई। इस बार वह सारे पासे हार गई। पार्वती जी को लगा कि इस बार शिव जी ने उनके साथ धोखा किया है। और वह शिव जी से शिकायत करने लगी। उसी समय पर विष्णु जी प्रकट हुए और बोले कि मेरी ऊर्जा से पासे चल रहे थे, शिवजी तो हमेशा की तरह भोले ही थे। तो शिवजी के जीतने पर भी पार्वती जी की वास्तव में हार नहीं हुई।

हमारा जीवन भी इस जुए के खेल की तरह ही है। पार्वती माया शक्ति है और शिवजी निर्दोष आनंदित चेतना का प्रतिनिधि [त्व करते हैं। अधिकतर लोगों ने जिन्होंने कुछ उच्च ऊर्जा की हल्की सी झलक भी अनुभव की होती है वे भी जीवन की दैनिक दिनचर्या में उलझ जाते हैं। भावनाओं के तूफान भीतर हलचल मचाते रहते हैं। माया शक्ति अक्सर विजयी होती हुई दिखाई देती है।

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