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कफ़न चोर
Sarita
|April Second 2026
जब भरोसा टूटता है तो इंसान टूट कर रह जाता है. डाक्टर्स पर भरोसा कर के रंजना का इलाज शुरू करवा दिया था श्याम ने. लेकिन क्या पता था उन्हें कि वे रंजना को जल्लादों के हाथों में सौंप रहे हैं.
यह कालोनी दिल्ली की मिडिल क्लास वाली थी जिस में आरडब्लूए कुछ न कुछ कराती रहती है. आज कालोनी के अरुण कम्यूनिटी हौल में सुबह श्याम कसरत करने के लिए पहुंचे तो वहां का नजारा ही बदला हुआ था. बड़ी चहलपहल हो रही थी. पूरे हौल में बड़ेबड़े बैनर लग चुके थे. 'जान है तो जहान है', मैडिकल एसोसिएशन की पहल पर आप की सेवा में उपस्थित रहेंगे- कार्डियोलौजिस्ट, डर्मियोलौजिस्ट, एन्डोक्राइनोलौजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलौजिस्ट, न्यूरोलौजिस्ट, और्थोपेडिक सर्जन, यूरोलौजिस्ट के साथ गाइनीकोलौजिस्ट, पेडियाट्रिशन और साइकोलौजिस्ट व पल्मोनोलौजिस्ट, औप्टोमेट्रिस्ट. श्याम यह देख कर हैरान थे. इतने डाक्टर्स का मेला.
घर आ कर जब श्याम ने यह बात रंजना को बताई तो वह उत्साह से भरी हुई बोल उठी, “मैं न कहती थी, लेकिन आप हैं कि मानने को तैयार नहीं, है न सुविधा की बात, इतने डाक्टर्स के नाम भी हम ने नहीं सुने और वे सभी आज एक जगह मिलेंगे.” 4 दिन पहले की बात थी कि रंजना ने औफिस में ही पति को फोन कर के कहा था, 'कालोनी के व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आया है,' रंजना ने पति को जानकारी देते हुए कहा था.
'क्या मैसेज है?' श्याम ने कहा.
'मैसेज है कि संडे को डाक्टर कुलकर्णी कालोनी में मैडिकल एसोसिएशन की ओर से एक कैंप लगा रहे हैं. सब से बड़ी बात, यह एकदम फ्री मैडिकल टैस्ट कैंप है,' रंजना उत्साह से बोली.
'तो लगने दो. डाक्टर्स का तो यह बिजनैस ही है.'
'आप भी न, अरे, बिजनैस परपज से नहीं, सोशल वर्क की दृष्टि से कैंप लगा रहे हैं वे, ताकि कालोनी के हर व्यक्ति का फ्री मैडिकल चैकअप हो सके. लोगों में हैल्थ अवेयरनैस के लिए वे शहरभर में इस तरह के कैंप लगाते रहते हैं.”
'ठीक है, लगाने दो, तुम क्यों इतनी उतावली हो रही हो ?'
'इसलिए कि एक तो संडे को दोनों की छुट्टी है, दोनों घर पर ही रहेंगे, दूसरे यह कि कैंप फ्री है. अगर हम कहीं मैडिकल चैकअप के लिए जाते हैं तो 4 हजार रुपए तो मामूली बात है. तो क्यों न कल हम दोनों भी अपना मैडिकल चैकअप करवा लें.'
'लेकिन हमें कोई प्रौब्लम नहीं तो क्यों जाएं चैकअप करवाने, जिन्हें कोई तकलीफ हो उन्हें चैकअप कराने दो. बिना वजह भीड़ बढ़ाने से क्या फायदा,' श्याम ने बहुत ही सहज भाव से कहा.
This story is from the April Second 2026 edition of Sarita.
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