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89 साल के उम्र में धर्मेंद्र ने अपनी जिंदादिली और जज्बे से सभी को हैरान कर दिया है।
Mayapuri
|Mayapuri Edition 2667
बॉलीवुड के "गरम धरम" माने जाने वाले, हमारे बॉलीवुड के असली ओरिजिनल ग्रीक गॉड, धर्मेंद्र जी का अस्पताल से परिवार के साथ घर लौटना, वाकई उन्हें वो पहलवान साबित करता है जिसके बारे में उन्होंने कई बार कहानी सुनाई थी कि वे अपने करियर की शुरुआत में जहां भी ऑडिशन देने जाते थे वहीं लोग उन्हें हीरो गिरी छोड़ कर पहलवानी करने की सलाह देते थे। आज जब वे बॉलीवुड के इतिहास में, इस सदी के सबसे लोकप्रिय हैंडसम स्टार हीरो के रूप में अपना नाम दर्ज कर चुके हैं तो उनकी वही शारीरिक ताकत ने दिखा दिया कि हां वे पहलवान है।
वैसे मौत तो सबको आती है, कोई अमर नहीं है, पहलवानों की भी आती है, मेरी भी आएगी, आपकी भी आएगी, आज भी आ सकती है, कल भी आ सकती है और दस साल बाद भी आ सकती है। लेकिन इस वक्त तो धर्मेंद्र के परिवार, उनके शुभचिंतकों, ब्रीचकैंडी अस्पताल के कुशल डॉक्टर्स, धरम जी के फैंस के दिलों में जो उम्मीदें और दुआएं थीं, वे पूरी हुई हैं। 89 साल के उम्र में धर्मेंद्र ने अपनी जिंदादिली और जज्बे से सभी को हैरान कर दिया है। अस्पताल से उनके बाहर आने की खबर ने उनके चाहने वालों को बहुत राहत और खुशी दी है।
ये धर्मेंद्र की हिम्मत ही है कि उन्होंने जीवन की चुनौतियां और संघर्ष से कभी हार नहीं मानी। ना तब, जब वे युवा थे, ना अब जब वे 89 वर्ष के हैं।
संघर्ष और चुनौतियों का सामना तो धर्मेंद्र साहब का तब से है जब वे सिर्फ फिल्मफेयर के एक टैलेंट कॉन्टेस्ट के भरोसे एकदम अकेले, बिना किसी जान पहचान, बिना किसी ठौर ठिकाना, बिना ज्यादा पैसों के वे लुधियाना से मुंबई आ गए थे। लेकिन जिस फिल्म के लिए उन्होंने ये कॉन्टेस्ट जीता था वो तो बनी ही नहीं। ना जाने कितनी बार उन्हें इस तरह हार का सामना करना पड़ा। कई स्ट्रगलर लड़कों के साथ एक छोटे से कमरे में रहते थे, कईकई रात दो वक्त का खाना भी नहीं जुगाड़ हो पाता था, एक बार तो भूख के मारे इतना बुरा हाल था कि अपने रूममेट द्वारा रखी गई इसबगोल की भूसी का पूरा पैकेट खा गए और फिर भुगतना पड़ा। कपड़े भी ऐसे सही नहीं थे जिसे पहन कर वे ऑडिशन देने जाते। दो जोड़ी कपड़ों को घुमा फिरा कर पहनते थे। सर्दी में ना उनके पास स्वेटर होती थी ना कोट और फिल्मों की पार्टी या मुहूर्त में तो शिरकत करने लायक उनके पास कोई इंतजाम भी नहीं होता था।
कपड़े बारिश में भीग जाते तो उसे सुखा कर फिर से पहन लेते थे।
शुरूआती संघर्ष के दिनों में वे एक और फिल्म के लिए चुने भी गए थे, लेकिन अंततः वो भी बन नहीं पाई, जिससे उन्हें काफी निराशा हुई। लेकिन धर्मेंद्र ने हार नहीं मानी। उन्होंने मशहूर अभिनेता मनोज कुमार से प्रेरणा लेकर और मेहनत करके जल्दी ही अपने लिए रास्ता बनाया। उस समय उनकी जेब हमेशा खाली रहती थी।
This story is from the Mayapuri Edition 2667 edition of Mayapuri.
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