सही व्यापार की सही राह कुण्डली से जानें

Jyotish Sagar|May 2020

सही व्यापार की सही राह कुण्डली से जानें
आज जो व्यक्ति नौकरी में है, वह भी यह अवश्य जानना चाहता है कि उसके लिए कौन-सा व्यापार करना उत्तम रहेगा। भले ही व्यापार करने की स्थिति में वह न हो, परन्तु व्यापार का क्षेत्र जानने की जिज्ञासा हम सभी को जीवन के किसी न किसी मोड़ पर अवश्य रहती है ...
रेखा कल्पदेव

बदलने का नाम ही जीवन है और जीवन रोज करवट बदलता है, जिससे हम सभी की घटनाओं में भी हर रोज बदलाव होता है। यह बदलाव हम सभी अपने दैनिक जीवन में सहजता से देख सकते हैं, इस बदलाव को महसूस कर सकते हैं। संसार के चराचर होने के कारण मनुष्य मात्र, जीव, जन्तु और प्राणीमात्र सभी चराचर हैं। बदलाव मात्र जीवन में ही नहीं, अपितु व्यक्ति के व्यवहार, व्यक्तित्व, कार्यक्षेत्र और विचारधारा में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है। हमने अक्सर देखा है कि किसी व्यक्ति को कई वर्षों से जानते हैं, समझने का दावा भी करते हैं, परन्तु अचानक से उस व्यक्ति के व्यवहार में आने वाला परिवर्तन हमारी समझ से परे होता है। यही स्थिति जीवन की घटनाओं में भी देखने में आती है।

कर्म व्यक्ति को जीने की वजह और जीने के साधन उपलब्ध कराता है। आजीविका का साधन ही उसके और उसके परिवार के पालन-

पोषण में सहयोग करता है। इसे ही व्यापार कहा जाता है। आज जो व्यक्ति नौकरी में है, वह भी यह अवश्य जानना चाहता है कि उसके लिए कौन-सा व्यापार करना उत्तम रहेगा। भले ही व्यापार करने की स्थिति में वह न हो, परन्तु व्यापार का क्षेत्र जानने की जिज्ञासा हम सभी को जीवन के किसी न किसी मोड़ पर अवश्य रहती है। कौन-सा व्यापार, कौन-सा व्यवसाय करना सही रहेगा, यह प्रश्न व्यवसायी और अव्यवसायी सभी के मन में होता है। सहजता से और उत्तम लाभ पाने की कामना से ही यह प्रश्न जन्म लेता है। ज्योतिष विद्या इस विषय में क्या कहती है आइए जानें।

जिस व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य सुस्थित हो, उच्चस्थ, मूल-त्रिकोणस्थ, मित्रराशिस्थ, अति- मित्रराशिस्थ हो, तो व्यक्ति में उत्तम आत्मविश्वास होता है और व्यक्ति व्यवसाय से लाभ उठाता है। इसके अतिरिक्त यदि सूर्य नवम भावस्थ हो, वर्गकुण्डलियों में बली हो तब भी

व्यक्ति नौकरी की जगह व्यवसाय से लाभ कमाता है। सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति को स्वर्ण विक्रेता, लेन-देन कार्य, चिकित्सा कार्य आदि देता है। चन्द्र का जन्मपत्री में सुस्थित होना, जैसे -उच्चादि राशि या वर्गोत्तम होना व्यक्ति को पानी से प्राप्त वस्तुओं के व्यापार से जोड़ता है।

व्यक्ति भावनाओं, प्रेम, स्नेह का प्रयोग कर व्यापार में सफल होने का प्रयास करता है। सेवा से जुड़े क्षेत्रों में भी उसे व्यापारिक लाभ की प्राप्ति होती है। राजसहयोग से लाभ और द्रव्य वस्तुओं के व्यापार में व्यक्ति के सफल होने की सम्भावनाएँ बनती हैं। जन्मपत्री में यही स्थिति मंगल की हो अर्थात् वह उच्च, वर्गोत्तम, मूलत्रिकोणस्थ, भाग्य भाव में हो, तो व्यक्ति साहस से जुड़े क्षेत्रों में लाभ प्राप्त करता है। उसके व्यापार की सफलता में पहल, उत्साह, ऊर्जा शक्ति, जोश और लीडरशीप गुणों की प्रमुखता होती है। ऐसे व्यक्ति को लेखन में भी कुशलता प्राप्त होती है।

प्रत्येक व्यक्ति जीवन के किसी न किसी मोड पर इस स्थिति में अवश्य होता है कि वह कौन-सा कार्य करे? यह निर्धारित करने में जन्मपत्री महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रत्येक व्यक्ति में अलग- अलग कार्य करने की योग्यता होती है, उसकी कार्यक्षमताएँ भी अलग-अलग होते हैं। जीवन की परिस्थितियाँ और सामर्थ्य भी अलग-अलग होता है और कार्यक्षेत्र में अपना सामर्थ्य लगाने के साधन भी अलग-अलग होते हैं। विवाह निर्णय के बाद कार्यक्षेत्र का सही निर्णय लेना जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख सकता है। जिस प्रकार एक सही व्यक्ति से विवाह आपके जीवन को स्वर्ग बना सकता है और एक गलत व्यक्ति से विवाह जीवन को नरक भी बना सकता है। ठीक इसी प्रकार कार्यक्षेत्र का निर्धारण अगर गलत हो, तो व्यक्ति को हानि के साथ- साथ जीवन में असफलता, निराशा और हताशा का सामना भी करना पड़ता है। कुण्डली एक मात्र ऐसा साधन है जो हमें जीवन में सही मार्ग का चयन करने में पूर्ण सहयोग करती रही है।

जन्मकुण्डली का लग्न भाव, लग्नेश, दशम

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May 2020