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सूर्य नमस्कार से आरोग्य लाभ
Jyotish Sagar
|May 2024
सूर्य नमस्कार की विशेष बात यह है कि इसका प्रत्येक अगले आसन के लिए प्रेरित करता है। इस क्रम में लगातार 12 आसन होते हैं। इन आसनों में श्वास को पूरी तरह भीतर लेने और बाहर निकालने पर बल दिया जाता है।
भारतीय संस्कृति में सूर्योपासना प्राचीन काल से ही चली आ रही है। सूर्य प्रत्यक्ष प्राणदाता देवता हैं। यह जीवनदाता एवं अपार ऊर्जा के स्वामी हैं। सूर्य की रश्मियों में अनेक रोग निवारक गुण विद्यमान हैं।
सूर्योपासना से हृदय रोग, रक्तचाप (ब्लडप्रेशर), चर्म रोग तथा कुष्ठ रोग दूर होते हैं। साथ ही, नेत्र रोग दूर होकर नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है। शरीर में बहा रक्त शुद्ध एवं बलशाली होता है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी मिलता है, जो शरीर की हड्डियों को मजबूत करता है। एक अंग्रेज लेखक डॉ. होनर्ग ने लिखा है, 'रक्त का पीलापन एवं पतलापन, लोहे की कमी, नसों की दुर्बलता आदि रोगों में सूर्य चिकित्सा लाभप्रद है।” सूर्य के प्रकाश में स्थित सात रंग की किरणें रोगों को नष्ट करने की अपूर्व क्षमता रखती है।
This story is from the May 2024 edition of Jyotish Sagar.
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