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क्रान्तिवीर विनायक दामोदर सावरकर!
Jyotish Sagar
|May 2024
सावरकर जेल से छूटकर जब वापस भारत आए, तो देश की आजादी का आन्दोलन जोर पकड़ रहा था। अब उन्होंने हिन्दू राष्ट्रवाद का समर्थन किया। जब देश के विभाजन का प्रस्ताव आया, तो सावरकर ने इसका विरोध किया पर तत्कालीन परिस्थितियों के कारण अन्ततोगत्वा देश का विभाजन हुआ।
वीर सावरकर भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के पुरोधा नेताओं की पंक्ति में अग्रणी थे। क्रान्तिवीर विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मामुर गाँव में हुआ था। इनका परिवार मध्यमवर्गीय था। इनके पिता का नाम दामोदर पन्त सावरकर था, जो गाँव के प्रतिष्ठित व्यक्तियों में गिने जाते थे। इनकी माता का नाम राधा बाई था। जब विनायक नौ वर्ष के हुए, तभी इनकी माता का निधन हो गया।
विनायक सावरकर की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव में ही हुई थी। बाल्यावस्था में ही इनकी स्वाध्याय में रुचि थी। बचपन में ही उन्होंने कुछ कविताएँ भी लिखी थीं। शिवाजी हाई स्कूल, नासिक से इन्होंने सन् 1901 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। अपने अध्ययनकाल में ये भारतीय वीरों की गाथाएँ शिवाजी, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, बाजीराव पेशवा आदि पढ़ने का शौक था। बचपन में ही राष्ट्रवादी विचारधारा इनके मन में घर कर गई थी। आजादी के लिए इन्होंने एक गुप्त समिति भी बनाई थी, जिसे 'मित्र मेला' नाम दिया गया।
This story is from the May 2024 edition of Jyotish Sagar.
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