Try GOLD - Free
पीपल को क्यों नहीं काटना चाहिए?
Jyotish Sagar
|May 2024
श्री मद्भगवद्गीता में भगवान् श्रीकृष्ण ने बताया है कि, पीपल उन्हीं का एक रूप है। इसी कारण पीपल की पूजा करने पर भगवान् श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और हमारे दःखों को दूर करते हैं।
श्रीकृष्ण कहते हैं कि समस्त वृक्षों में पीपल का वृक्ष सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि यह साक्षात् मेरा ही रूप है।
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे। अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नमः ॥
आयुः प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदाम्। देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गतः ।
अर्थात् पीपल की जड़, मध्य भाग एवं अग्रभाग में क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास होता है। यही नहीं, इसके अन्य भागों में वसु, रुद्र, वेद, यज्ञ, समुद्र, कामधेनु के साथ ही कई अन्य देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। आइए जानते हैं, इतने महान् वृक्ष पीपल की महिमा और इसकी कथा :
पीपल का वृक्ष के लगाने अथवा पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाने से ग्रहों की शान्ति होती है। यदि जन्मकुण्डली में ग्रह अपना प्रभाव सही नहीं दे रहे हैं, तो पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाने से उ ग्रह की शान्ति हो जाती है। देखा गया है कि जिस जातक की जन्मकुण्डली में राहु और केतु का प्रभाव अशुभ हो, तो पीपल का वृक्ष लगाने से इन ग्रहों की शान्ति होती है। यदि किसी जातक की जन्मकुण्डली में शनि का कुप्रभाव है, जैसे साढ़ेसाती अथवा ढैया है, तो पीपल का वृक्षारोपण किया जाए, तो शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। यहाँ तक कि अगर पीपल के वृक्ष पर जल भी चढ़ाते हैं, तो उससे भी शनि ग्रह की शान्ति होती है।
पीपल पर जल कैसे चढ़ाएँ?
एक लोटा लीजिए। उसमें दूध और थोड़ा-सा उसमें गुड़ डालें और जल मिलाएँ। आपका मुँह जल चढ़ाते समय या तो पूर्व दिशा में सर्वोत्तम रहता है या फिर उत्तर दिशा में उत्तम रहता है। फिर पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएँ। शनिवार के दिन जल चढ़ाना विशेष लाभकारी माना जाता है। जब भी आप पीपल पर जल अर्पित करें, तो निम्नलिखित मन्त्र का जप करना चाहिए:
आयुः प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदाम्। देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गतः।।
अर्थात हे पीपल देवता! आयु भी दीजिए, सन्तति, समृद्धि, धन-धान्य आदि सब कुछ आप मुझे दीजिए, मैं आपकी शरण में आया हूँ।
जन्मपत्रिका के ग्रह के प्रभाव की शान्ति के लिए पीपल पर जल अर्पित करते समय निम्नलिखित शनि मन्त्र का स्मरण करें :
ॐ शं शनैश्चराय नमः ।
This story is from the May 2024 edition of Jyotish Sagar.
Subscribe to Magzter GOLD to access thousands of curated premium stories, and 10,000+ magazines and newspapers.
Already a subscriber? Sign In
MORE STORIES FROM Jyotish Sagar
Jyotish Sagar
क्या लिखा है हमारे भाग्य में...?
ज्योतिष और प्रारब्ध
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
ग्रहों के अंशों का महत्त्व
लग्न की डिग्री बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। कुण्डली में जितने भी ग्रहों की डिग्री लग्न की डिग्री के आस-पास होते हैं, वे सभी अपना पूर्ण फल देने में समर्थ होते हैं।
8 mins
May 2026
Jyotish Sagar
जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें मनाएँ कैसे?
मनुष्य का पूरा जीवन 9 ग्रहों की 27 नक्षत्रों में चाल और दृष्टि पर टिका हुआ है। सामान्य भाषा में कहें, तो जब ग्रहों की कृपा होती है, तो मनुष्य बलवान् हो जाता है और जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो वह भिखारी भी बन जाता है। इस आलेख में हम बता रहे हैं कि जब ग्रह नाराज हो जाएँ, तो उन्हें कैसे मनाएँ?
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कन्या लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
कैसे करें सटीक फलादेश (भाग-227)
7 mins
May 2026
Jyotish Sagar
श्रीशंकराचार्यकृत श्रीनृसिंहभुजङ्गस्तोत्रम्
(मूल मातृका/पाण्डुलिपि से प्रथम बार प्रकाशित एवं अनूदित)
6 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कोकिलावन जहाँ शनिदेव रो पड़े श्रीकृष्ण के दर्शन को!
मथुरा जनपद की पावन भूमि, जहाँ प्रत्येक कण में श्रीकृष्ण की लीलाओं की सुगन्ध व्याप्त है, वहीं कोसी और नन्दगाँव के मध्य स्थित कोकिलावन दिव्य और रहस्यमयी तीर्थस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।
3 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कैसी रहेगी सम्राट चौधरी की सरकार?
शपथ ग्रहण कुण्डली विश्लेषण
2 mins
May 2026
Jyotish Sagar
कुण्डली में विवाह, सन्तान एवं दाम्पत्य सुख : एक पर्यवेक्षण
मनुष्य जीवन का सबसे कोमल, जटिल और जरूरी पक्ष होता है- विवाह, सन्तान और दाम्पत्य जीवन। यह वह पक्ष है जहाँ प्रेम, आत्मीयता, त्याग और संघर्ष की असली परीक्षा होती है।
5 mins
May 2026
Jyotish Sagar
नीचराशिस्थ बुध के फल
जन्मपत्रिका में नीचराशिस्थ ग्रहों के फल : एक विस्तृत अध्ययन (भाग-21)
13 mins
May 2026
Jyotish Sagar
वोट से क्रान्ति के नायक पीटर माग्यार
जन्मपत्रिका विश्लेषण
9 mins
May 2026
Listen
Translate
Change font size
