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सुरक्षा उपायों को बोझ मानती हैं निजी कंपनियां

November 02, 2025

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Jansatta

उच्च जोखिम के बावजूद ज्यादातर यात्री निजी बसों पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन के विकल्प या तो अपर्याप्त हैं या मौजूद ही नहीं हैं।

राज्यों द्वारा संचालित अंतर शहरी बसों की संख्या 2022 में 1,01,908 से घटकर 2025 में 97,165 रह गई है। दरअसल, पुराने वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, और विद्युत चालित बसों के परिचालन में देरी हो रही है।

सेवाओं में इस बढ़ते अंतर को बड़े पैमाने पर निजी संचालकों ने पाटा है, जो एक बेहद बिखरा हुआ क्षेत्र है जहां लगभग 78 फीसद व्यवसाय में पांच से भी कम बसों का बेड़ा होता है। कड़ी प्रतिस्पर्धा से संचालित इस उद्योग में, मुनाफा अक्सर कटौती पर निर्भर करता है। चालकों और सहायकों को कम वेतन दिया जाता है। उनसे अत्यधिक काम लिया जाता है और उनकी सीमा से परे काम करवाया जाता है। साथ ही, सुरक्षा उपायों को अनावश्यक लागत माना जाता है, जो पहले से ही कम मुनाफे को और कम कर देते हैं। साल 2013 से, सात बड़ी बस आग लगने की घटनाओं में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यह संख्या उन अनगिनत छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर हैं जो कभी सुर्खियां नहीं बनीं। नए हादसों में 24 अक्तूबर को आंध्र प्रदेश के कुरनूल में 19 से अधिक लोगों की जान चली गई, तथा 14 अक्तूबर को राजस्थान के थईयात गांव में 20 लोगों की मौत हो गई।

ये घटनाएं समान खतरों को उजागर करती हैं

ज्वलनशील आंतरिक भाग, अवरुद्ध या संकीर्ण निकास, गायब या दोषपूर्ण आपातकालीन खिड़कियां, अग्नि सुरक्षा उपकरण का अभाव, भागने के लिए बहुत कम समय, तथा अपर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारी।

बसें इतनी खतरनाक क्यों हैं?

माना जा रहा है कि राजस्थान की दुर्घटना में आग वातानुकूलित वायरिंग में शार्ट सर्किट के कारण लगी थी। कुरनूल में, बस एक मोटरसाइकिल से टकरा गई और कुछ ही पल में आग की लपटों में घिर गई। हालांकि, ऐसी घटनाएं शायद ही कभी किसी एक कारण से होती हैं। ऐसी आग लगने और उसके परिणामस्वरूप होने वाली बड़ी जनहानि के लिए कई कारण जिम्मेदार होते हैं।

1. सड़क दुर्घटनाएं : भिड़ंत (यहां तक कि छोटी भी) बड़ी आग का कारण बन सकती हैं, क्योंकि बसों का रख-रखाव ठीक से नहीं किया जाता, और उनके पुर्जे क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

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