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नवाचारः सार्वजनिक खरीद व्यवस्था दुरुस्त हो
Business Standard - Hindi
|September 25, 2025
हाल में 1 लाख करोड़ रुपये लागत से शुरू अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) योजना भारत की नवाचार नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत दे रही है।
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देश में पहली बार निजी क्षेत्र नवाचार चर्चा के केंद्र में है और इसके लिए रकम विशेष-उद्देश्य कोष के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। इस रकम का निवेश पेशेवर प्रबंधकों, रियायती ऋणों, शेयरों और फंड ऑफ फंड्स संरचना के जरिये हो रहा है।
अब तक शोध एवं विकास (आरएंडडी) पर निवेश ज्यादातर सार्वजनिक संस्थानों में होता था। ये सार्वजनिक संस्थान देश में वैज्ञानिक आधारशिला रखा करते थे। मगर अब आरडीआई के माध्यम से एक अरब से अधिक लोगों की नवाचार ऊर्जा का लाभ हासिल किया जा सकता है जो महज कुछ हजार सरकारी वैज्ञानिकों की तुलना में कहीं अधिक लाभप्रद एवं कारगर साबित होगा। इससे- विस्तार (स्केल), रफ्तार (स्पीड) और व्यय (स्पेंड) इन तीन मोर्चों पर कदम तेजी से बढ़ाने में मदद मिल रही है। शोध एवं विकास क्षेत्र स्टार्टअप इकाइयों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और आम लोगों के लिए खोलने से इसका विस्तार होता है और दायरा भी काफी व्यापक हो जाता है।
निजी क्षेत्र द्वारा बाजार के अनुकूल होने और निर्धारित समयसीमा पर अधिक जोर देने से आरएंडडी की रफ्तार बढ़ती है। निजी क्षेत्र से निवेश आने और फंड ऑफ फंड्स की भागीदारी से दीर्घ अवधि से चली आ रही पूंजी की समस्या दूर हो जाती है। बदलाव लाने की दिशा में शुरू की गई यह पहल विभिन्न इकाइयों की भागीदारी बढ़ाने के साथ ही नए मुकाम हासिल करने में मददगार साबित हो सकती है और तकनीकी विकास को ताकत मिल सकती है।
आरडीआई के पूरी तरह कारगर होने के लिए सार्वजनिक खरीद में सुधारों को बढ़ावा देना निहायत जरूरी है जिससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को सक्रिय समर्थन मिलेगा। इसके लिए एक समर्पित नीति इसलिए जरूरी है क्योंकि नवाचार शायद ही परंपरागत नियमों जैसे कई बोलीदाताओं या खरीदारी के पुराने लेखा-जोखा के साथ फिट बैठता है। भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सरकारी खरीद की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी होती है, इसलिए सरकार बाजार को दिशा देने एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर अत्यधिक जोर देती है। शुरुआती कदम के तौर पर सरकार नई तकनीक का समर्थन कर सकती है, उपभोक्ताओं में विश्वास बहाल कर सकती है, राजस्व के स्थिर स्रोत दे सकती है और बाजार में नए उत्पाद लाने में नवाचार करने वाले लोगों के लिए जोखिम कर सकती है।
This story is from the September 25, 2025 edition of Business Standard - Hindi.
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