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ऋतुचक्र में गड़बड़ी, संकट का संकेत

Jansatta Chandigarh

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July 28, 2025

सावन माह से पहले देश के विभिन्न राज्यों में एक ही स्थान पर अत्यधिक बारिश होने से जो गंभीर परिस्थितियां निर्मित हुई, उसने प्राकृतिक असंतुलन की भयावह तस्वीर को प्रकट किया है। पिछले कुछ दशकों से ऋतु-विकृतियों में वृद्धि हुई है।

- विकेश कुमार बडोला

ज ब से ऋतु चक्र बिगड़ा है, तब से बारिश भी अनिश्चित हो चुकी है। वर्षा ऋतु से पहले होने वाली अतिवृष्टि कई तरह के संकट पैदा करती रही है। बाढ़ इनमें से प्रमुख है। इस दौरान जनजीवन खतरे में पड़ जाता है। तब भयावह तबाही के दृश्य दिखते हैं।

मानसून आने के बाद कहीं कम, तो कई ज्यादा बारिश शुरू हो रही है। मगर अत्यधिक वर्षा के कारण देश के कुछ राज्यों में ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के कई प्रांतों में भी बाढ़ की स्थितियां देखने में आई हैं। मई के अंत से लेकर पूरे जून तक राजधानी दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, प्रदेश, बिहार और असम में अनिश्चित, अनियंत्रित तथा उथल-पुथल मचाने वाली वर्षा ने जनजीवन को संकट में डाल दिया था। वहीं जुलाई के पहले पखवाड़े में भी राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में अधिक वर्षा के कारण बाढ़ से ग्रस्त क्षेत्रों के लोगों का जीवन कष्टपूर्ण हो गया।

अप्रैल के बाद से अब तक देश में बादल फटने, बिजली गिरने तथा अतिवृष्टि के कारण आई बाढ़ से कई लोगों की मौत हो चुकी है। लाखों- करोड़ों रुपए की व्यक्तिगत तथा सार्वजनिक संपत्तियां-परिसंपत्तियां नष्ट हो चुकी हैं। मृतकों के परिवार वालों के सामने अन्न-जल संकट के साथसाथ आवास, आजीविका और सामाजिक-आर्थिक असुरक्षा की समस्याएं भी पैदा हो गई हैं। वर्षा ऋतु बीतने तक उनका दैनिक जीवन बहुत कष्टकारी बना रहेगा। यह परिस्थिति प्राकृतिक प्रतिकूलता तथा जलवायु असंतुलन की पुनरावृत्ति के कारण गत तीस-चालीस वर्षों से हर वर्ष अधिक भयावह रूप से दिख रही है।

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