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बढ़ती उम्र के साथ सेहत का रखें खास ध्यान
Sadhana Path
|January 2026
35 से 40 की उम्र स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है। विशेषकर, महिलाओं के लिए। उन्हें ऐसे समय अपना अधिक ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि वे इस समय कई तरह के हॉर्मोनल बदलावों से गुजर रही होती हैं। नतीजतन उनको कई तरह की शारीरिक समस्याएं घेर लेती हैं।
आमतौर पर महिलाएं अपनी सेहत को लेकर लापरवाह रहती हैं। नतीजतन बढ़ती उम्र के साथ कई बीमारियां साथ आने लगती हैं, जिनमें अनियमित मासिकधर्म, फाइब्रॉइड और सिस्ट, मोनोपॉज, माइग्रेन, कैल्शियम में कमी, ऑस्टियोपोरोसिस, यूरिक एसिड बढ़ना, मांसपेशियों का कमजोर पड़ना, ब्रेस्ट कैंसर, ओवरी डिस्प्लेसमेन्ट, आदि प्रमुख हैं। ज्यादातर परेशानियां आंत और पेट से जुड़ी रहती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण उनका खानपान और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होना है।
30 के बाद होने वाली समस्याएं
महिलाओं में 35 तो कुछ महिलाओं में 40 के बाद भी शारीरिक दिक्कतें होना शुरू होती हैं। इनमें प्रमुख हैं-
कुछ महिलाओं को इररेगुलर पीरियड्स की प्रॉब्लम शुरुआत से ही रहती है। इसे पीसीओएस या पीसीओडी भी कहते हैं। सामान्यतः पीरियड्स की अवधि 28 से लेकर 32 दिन की मानी जाती है। बढ़ती उम्र में यह 21 से 40 दिन तक कि हो जाती है।
फाइब्रॉइड और सिस्ट
अनियमित मासिकधर्म होने का एक कारण यह भी है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है क्योंकि कई बार फाइब्रॉइड या सिस्ट होने पर भी आपकी पीरियड साइकिल नॉर्मल रहती है। फाइब्रॉइड या सिस्ट का साइज 1 मि.मी. से लेकर 20 मी.मी. तक हो सकता है। यदि आपका फाइब्रॉइड 1 द्वद्व या फिर 5 मि.मी. तक भी होता है तो डरने की जरूरत नहीं है। आप आसानी से कंसीव कर सकती हैं।
मोनोपॉज
आजकल बहुत जल्दी मोनोपॉज होने लगा है। जबकि हमारी माएं और दादी-नानी 50 से 55 साल तक एक्टिव रहती थीं। इसका कारण उनका लाइफस्टाइल और नियमित मासिक धर्म था। वहीं आजकल 35 से 40 के बीच ही मोनोपॉज हो जाता है।
माइग्रेन
माइग्रेन की समस्या महिलाओं में सबसे ज्यादा देखी गई है। दरअसल, मोनोपॉज के बाद से ही महिलाओं में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव आने लगते हैं। इसका कारण उनके शरीर में एस्ट्रोजन की कमी को माना जाता है।
Diese Geschichte stammt aus der January 2026-Ausgabe von Sadhana Path.
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