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विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति
Sadhana Path
|January 2026
भारत त्योहारों का देश है, यहां प्रत्येक त्योहार को हर्ष-उल्लास के साथ मनाया जाता है। उन्हीं में से एक त्योहार है मकर संक्रांति जिसे भारत के प्रत्येक राज्य के लोग अपनी परंपरा, संस्कृति के अनुसार मनाते हैं। कैसे मनाया जाता है भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्राति का त्योहार आइए जानते हैं
भारतीय रीति-रिवाज के अंतर्गत जन मानस के साथ त्योहारों का घनिष्ठ रिश्ता रहा है। कृषि प्रधान होने की वजह से ज्यादातर त्योहारों की पृष्ठभूमि में कृषि रही है। विश्लेषण करने से विदित होता है कि भारतवर्ष के पर्व-त्योहार, नक्षत्र, महीने मौसम के ऊपर आधारित हैं। धरा पर रहने वाले मानव, जीव-जन्तु पक्षी और कीड़े अनेक वजहों से सूर्य के प्रति कृतज्ञ हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त की वजह से धरा पर तमाम प्रकार के बदलाव होते हैं। चूंकि सूर्य प्रकाश और ऊष्मा देता है। प्रकाश तथा ऊष्मा की सहायता से वनस्पतियों का भोजन उपलब्ध हो पाता है। भारतीय त्योहारों के पीछे सूर्य की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। हिन्दू काल गणना के मुताबिक माघ माह के शुरू में अर्थात् जनवरी के मध्य में सूर्य क्रमशः उत्तर की दिशा में उदय होने लगता है, जिसे उत्तरायण कहते हैं। सूर्य का उत्तरायण होना लोक मंगलकारी शुभ क्षण माना जाता है। इसके प्रारंभिक दिवस को बेहद पवित्र माना जाता है। उसी दिन को भारतीय रीति-रिवाज में मकर संक्रांति पर्व के रूप में मनाया जाता है।
उत्तर भारत में इसको 'खिचड़ी पर्व' कहते हैं। मकर संक्रांति के मौके पर लोग सामूहिक रूप से गंगा-यमुना या पवित्र सरोवरों, नदियों में स्नान करते हैं। इस दिन गंगा नदी में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है। सूर्य का प्रतिनिधि ताम (तांबा) या स्वर्ण है। अतः अर्घ्य प्रदत्त करने के लिए तामपात्र ही श्रेयस्कर होता है। जनश्रुति है कि प्रयाग के कुंभ मेले में स्नान करने से जो पुण्य प्राप्त होता है वही पुण्य मकर संक्रांति के दिन नदी में स्नान करने से प्राप्त होता है। ठंड के बावजूद भारी तादाद में लोग गंगा नदी में स्नान करते हैं। सूर्य उदय होने से पहले स्नान कर सूर्योदय के साथ-साथ सूर्य की आराधना करते हैं। स्नान के साथ तिल-गुड़ के लड्डू एवं खिचड़ी देने और खाने की रीति रही है।
Diese Geschichte stammt aus der January 2026-Ausgabe von Sadhana Path.
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