Kendra Bharati - केन्द्र भारती - March 2017

Publisher: Vivekananda Kendra
Category: Culture
Language: Hindi
Frequency : Monthly

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दिशाबोध - ‘मैं’ नहीं ‘हम’ =============== राष्ट्र के रूप में हमारे पास किसी वस्तु का अभाव नहीं है। भारत के पास अत्यधिक उपजाऊ भूमि, अच्छी वर्षा, विशाल मानवीय संसाधन, बौद्धिक व तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति, एक दीर्घ व सतत् इतिहास है तथा संघर्षरहित धर्म व दर्शनशास्त्र सजीव रूप में है। फिर भी हम विष्व के लिए दिशा निश्चित नहीं कर रहे हैं। वे जो ऐसा करते हैं, वे संस्कृति व विचारधारा की उपज हैं, जो असहिष्णुता, घृणा व हिंसा को जन्म देती है तथा दूसरों को अधीन करके उन पर शासन करने हेतु बाध्य करती है, क्यों ? क्योंकि हम बाह्य आक्रमण का वैचारिक व भौतिक दोनों प्रकार से सामना करने के लिए संगठित नहीं थे। -------------------------------------------------------------------------------- संगठन की भावना का मूल है कि सामूहिक ‘हम’ अर्थात् धर्म की पुनः स्थापना के लिए संगठन के हित में ‘मैं’ को नष्ट करना। एक साधक अपने अन्दर के ‘मैं’ को नष्ट करता है तथा अन्ततः अपने ‘मैं’ को परम सत्य में विलीन कर देता है। ठीक यही धर्म की पुनःस्थापना करने हेतु समर्पित संगठन का कार्यकर्ता करता है। धर्म की पुनःस्थापना के आदर्श का ही लगभग रूप है ऐसे संगठन की विशाल पहचान में कार्यकर्ता अपने ‘मैं’ को समाने की प्रक्रिया अपनाता है। संगठन ‘हम’ है, जिसमें वह अपने मैं, को समा देता है।

विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की सांस्कृतिक मासिक हिन्दी पत्रिका "केन्द्र भारती"


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