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कर्क लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र एवं शनि के फल
Jyotish Sagar
|July 2025
प्रस्तुत लेखमाला 'कैसे करें सटीक फलादेश?' के अन्तर्गत विगत तीन अंकों से कर्क लग्न के नवम भाव में स्थित ग्रहों के फलों का विवेचन किया जा रहा है, जिसमें अभी तक सूर्य से गुरु तक के फलों का विवेचन कर चुके हैं। उसी क्रम में प्रस्तुत आलेख में कर्क लग्न के नवम भाव में शुक्र और शनि के फलों का राशिगत, नक्षत्रगत, दृष्टिजन्य एवं युतिजन्य फलों का वर्णन कर रहे हैं।
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कर्क लग्न के नवम भाव में स्थित शुक्र के फल
कर्क लग्न में शुक्र चतुर्थेश एवं एकादशेश होकर नवम भाव में अपनी उच्च राशि में स्थित होता है। चतुर्थेश-एकादशेश का नवम भाव में स्थित होना प्रायः शुभ फलदायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त नैसर्गिक रूप से भी त्रिकोण भाव नवम में शुभ ग्रह की अपनी उच्च राशि में स्थिति शुभ फलदायक होती है। चतुर्थेश का अपनी उच्च राशि में स्थित होना जातक को सम्पत्ति आदि की दृष्टि से सम्पन्न बनाता है। ऐसा जातक प्रायः अपने पिता से अधिक धन कमाने वाला और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीने वाला होता है। जब भी उसे अवसर प्राप्त होते हैं, तो वह बेहतर सफलता प्राप्त कर पाता है। एकादशेश की भाग्य भाव में स्थिति भी शुभ फलदायक है। जातक को उसके द्वारा किए गए कर्मों का बेहतर प्रतिफल मिलता है। एक प्रकार से जातक अपने द्वारा किए गए प्रयास, परिश्रम एवं कर्मों में सफल होता है। उसे भाग्य का पर्याप्त सहारा मिलता है।
यदि नवम भाव में स्थित शुक्र का सम्बन्ध लग्नेश चन्द्रमा और योगकारक मंगल के साथ हो रहा हो, तो श्रेष्ठ राजयोग का निर्माण होता है। इसके अतिरिक्त गुरु के साथ शुक्र का सम्बन्ध भी शुभ फलदायक होता है और राजयोग का निर्माण होता है। जातक को कॅरिअर में अपेक्षानुरूप सफलता प्राप्त होती है।
नवमस्थ उच्च राशि के शुक्र के चलते जातक प्रायः शक्ति उपासक होता है। यदि शुक्र पर अन्य ग्रहों का प्रभाव नहीं हो, तो वह सौम्य देवियों गौरी, लक्ष्मी आदि की उपासना करने वाला होता है और सामान्यतः भक्तिपूर्ण उपासना करता है।
दृष्टिजन्य फल : नवम भाव में स्थित शुक्र अपनी पूर्ण दृष्टि से तृतीय भाव को देखता है। शुक्र की तृतीय भाव पर दृष्टि के फलस्वरूप जातक को भाई-बहिनों का अपेक्षित सहयोग प्राप्त होता है। सामान्यतः जातक को पारिवारिक सुख पर्याप्त मिलता है।
नक्षत्रगत फल : कर्क लग्न के नवम भाव में शुक्र पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद अथवा रेवती नक्षत्र में स्थित हो सकता है।
यदि शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में स्थित हो, तो जातक को तुलनात्मक रूप से अधिक शुभ फल मिलते हैं। कॅरिअर आदि में भाग्य का समर्थन मिलता है और जातक का जीवनस्तर भी बेहतर होता है।
Bu hikaye Jyotish Sagar dergisinin July 2025 baskısından alınmıştır.
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