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नए अकादमिक दौर की ओर
India Today Hindi
|August 13, 2025
तेजी से बढ़ते रिसर्च, मजबूत प्लेसमेंट और बढ़ते नामांकन के बूते दिल्ली विश्वविद्यालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को पीछे छोड़ते हुए भारत की पब्लिक हायर एजुकेशन की कमान संभाली
मई 1922 में सेंट्रल लेजिस्लेचर ऐक्ट के तहत एक मामूली शुरुआत से अस्तित्व में आया दिल्ली विश्वविद्यालय आज भारत का एक वर्ल्ड-क्लास उच्च शिक्षा संस्थान बन चुका है. अपने पहले साल में इसमें दो फैकल्टी थीं-आर्ट्स और साइंस-और तीन बुनियादी कॉलेजों के जरिए सीमित अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स चलाए जाते थे. ये तीन कॉलेज थेः सेंट स्टीफंस (1881), हिंदू कॉलेज (1899) और रामजस कॉलेज (1917). उस समय आठ विभाग थेः संस्कृत, इतिहास, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, अरबी, फारसी, भौतिकी और रसायन. लाइब्रेरी की स्थापना 1,380 किताबों के दान से हुई थी, जो उस दौर की ज्ञान और पढ़ाई की भावना का प्रतीक थी.
अब 2025 में यह विश्वविद्यालय 90 अंडरग्रेजुएट, 135 पोस्टग्रेजुएट और 71 पीएचडी प्रोग्राम ऑफर करता है. इसके अलावा 37 सर्टिफिकेट और 114 डिप्लोमा कोर्स भी चल रहे हैं. 407 एकड़ में फैले इस संस्थान में 91 कॉलेज, 16 फैकल्टी, 86 शैक्षणिक विभाग और 23 सेंटर, स्कूल और संस्थान शामिल हैं. यहां 6.2 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. यह इसे भारत के सबसे बड़े और विविधता वाले पब्लिक विश्वविद्यालयों में शामिल करता है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में इस समय 11,000 से ज्यादा छात्र पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में नामांकित हैं, जो उन्नत शैक्षणिक प्रशिक्षण, रिसर्च में उत्कृष्टता और बहुविषयक शिक्षा के प्रति संस्थान की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है. कुल 109 शैक्षणिक विभागों, केंद्रों, संस्थानों और स्कूलों में से 87 पूरी तरह से पीजी और उससे ऊपर की पढ़ाई को समर्पित हैं.सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, यूनिवर्सिटी ने यूजीसीएफ (अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क) 2022 और पीजीसीएफ (पोस्टग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क) 2025 को अपनाया है. इसके जरिए कोर्स में लचीलापन, बहुविषयक सोच, भारतीय ज्ञान प्रणाली और रिसर्च पर केंद्रित पढ़ाई को बढ़ावा मिला है.
Bu hikaye India Today Hindi dergisinin August 13, 2025 baskısından alınmıştır.
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