Facebook Pixel नए अकादमिक दौर की ओर | India Today Hindi – news – Lesen Sie diese Geschichte auf Magzter.com
Mit Magzter GOLD unbegrenztes Potenzial nutzen

Mit Magzter GOLD unbegrenztes Potenzial nutzen

Erhalten Sie unbegrenzten Zugriff auf über 9.000 Zeitschriften, Zeitungen und Premium-Artikel für nur

$149.99
 
$74.99/Jahr

Versuchen GOLD - Frei

नए अकादमिक दौर की ओर

India Today Hindi

|

August 13, 2025

तेजी से बढ़ते रिसर्च, मजबूत प्लेसमेंट और बढ़ते नामांकन के बूते दिल्ली विश्वविद्यालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को पीछे छोड़ते हुए भारत की पब्लिक हायर एजुकेशन की कमान संभाली

- शैली आनंद

नए अकादमिक दौर की ओर

मई 1922 में सेंट्रल लेजिस्लेचर ऐक्ट के तहत एक मामूली शुरुआत से अस्तित्व में आया दिल्ली विश्वविद्यालय आज भारत का एक वर्ल्ड-क्लास उच्च शिक्षा संस्थान बन चुका है. अपने पहले साल में इसमें दो फैकल्टी थीं-आर्ट्स और साइंस-और तीन बुनियादी कॉलेजों के जरिए सीमित अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स चलाए जाते थे. ये तीन कॉलेज थेः सेंट स्टीफंस (1881), हिंदू कॉलेज (1899) और रामजस कॉलेज (1917). उस समय आठ विभाग थेः संस्कृत, इतिहास, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, अरबी, फारसी, भौतिकी और रसायन. लाइब्रेरी की स्थापना 1,380 किताबों के दान से हुई थी, जो उस दौर की ज्ञान और पढ़ाई की भावना का प्रतीक थी.

imageअब 2025 में यह विश्वविद्यालय 90 अंडरग्रेजुएट, 135 पोस्टग्रेजुएट और 71 पीएचडी प्रोग्राम ऑफर करता है. इसके अलावा 37 सर्टिफिकेट और 114 डिप्लोमा कोर्स भी चल रहे हैं. 407 एकड़ में फैले इस संस्थान में 91 कॉलेज, 16 फैकल्टी, 86 शैक्षणिक विभाग और 23 सेंटर, स्कूल और संस्थान शामिल हैं. यहां 6.2 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. यह इसे भारत के सबसे बड़े और विविधता वाले पब्लिक विश्वविद्यालयों में शामिल करता है.

imageदिल्ली विश्वविद्यालय में इस समय 11,000 से ज्यादा छात्र पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में नामांकित हैं, जो उन्नत शैक्षणिक प्रशिक्षण, रिसर्च में उत्कृष्टता और बहुविषयक शिक्षा के प्रति संस्थान की लगातार प्रतिबद्धता को दिखाता है. कुल 109 शैक्षणिक विभागों, केंद्रों, संस्थानों और स्कूलों में से 87 पूरी तरह से पीजी और उससे ऊपर की पढ़ाई को समर्पित हैं.

सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, यूनिवर्सिटी ने यूजीसीएफ (अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क) 2022 और पीजीसीएफ (पोस्टग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क) 2025 को अपनाया है. इसके जरिए कोर्स में लचीलापन, बहुविषयक सोच, भारतीय ज्ञान प्रणाली और रिसर्च पर केंद्रित पढ़ाई को बढ़ावा मिला है.

WEITERE GESCHICHTEN VON India Today Hindi

India Today Hindi

बीता जीवन देख रहा है

अमिताभ घोष का उपन्यास घोस्ट- आइ किसी बड़े घटनाक्रम से नहीं, बल्कि एक छोटे-से असहज क्षण से शुरू होता है.

time to read

2 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

बर्फ के उस पार का महादेश

दुनियाभर के अधिकतर यात्रा वृत्तांत भागने से शुरू होते हैं.

time to read

3 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

निष्कपट नाइट

टेलीविजन की नंबर 1 सीरीज रचने के बाद जॉर्ज आर. आर. मार्टिन के कया-संसार से अब निकली है अ नाइट ऑफ द सेवन किंगडम्स. है तो यह अपनी दोनों पूर्ववर्ती, विराट सीरीज की दुनिया में रची बसी लेकिन उनसे बिल्कुल अलग ट्रीटमेंट लिए यह ताजगी भरी प्रस्तुति एक मस्ट वॉच

time to read

2 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

जांच में देरी की जानलेवा कीमत!

इलाज से काबू में आ सकने वाले अलग-अलग तरह के कैंसर देरी से पहचाने जाने के चलते फैल रहे. वहीं अंतिम चरण वाले कैंसर मरीजों की देखभाल और इलाज से जुड़ी नीतियों में सटीक आंकड़ों की कमी बड़ी खाई बन रही

time to read

9 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

करुणा ही जीवन

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी की हाल में प्रकाशित पुस्तक करुणा, द पावर ऑफ कम्पैशन युद्धरत दुनिया में करुणा को बताती है हर समस्या का समाधान

time to read

1 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

मोह के धागों का तनाव

आज तक नॉर्वे की किसी भी फिल्म को ऑस्कर नहीं मिला. 2-3 दफे नॉमिनेशन जरूर मिलेः नाइन लाइव्स (1957), द पाथफाइंडर (1987) और फिर एक लंबे फासले बाद योकिम ट्रियर की द वर्स्ट परसन इन द वर्ल्ड (2021) को.

time to read

1 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

यहां भगवा दल सांसत में

अकाली दल में अरविंद खन्ना की वापसी ने भाजपा की पंजाब इकाई की कमजोरी को उघाड़कर रख दिया. उसमें भरोसेमंद चेहरों की कमी तो है ही, केंद्रीय रणनीति को स्थानीय हकीकतों से जोड़ने के लिए भी उसे मशक्कत करनी पड़ रही

time to read

3 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

एक ने पकड़ी रफ्तार दूसरे पर सवालों के बार

बिहार सरकार के दो डिप्टी सीएम इन दिनों लगातार चर्चा में हैं. एक भूमि विवाद निबटाने को लेकर अपनी सक्रियता की वजह से तो दूसरा बढ़ते अपराध को काबू न कर पाने की विफलता के कारण

time to read

7 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

भारी पड़ता दुस्साहस का दांव

पन्नू प्रकरण एक बड़ी नाकामी के तौर पर उभरकर सामने आया है जो भारत को ऐसे समय में और भी अलग-थलग कर सकता है जब अमेरिका से रिश्तों के मामले में वह पहले ही कमजोर स्थिति में

time to read

3 mins

March 04, 2026

India Today Hindi

India Today Hindi

सफर का नाम अब फर्राटा

वर्षों की देरी के बाद देशभर के प्रमुख राजमार्ग आखिरकार पूरे होने के करीब. इससे सफर में लगने वाला समय घटने और आर्थिक विकास को खासी रफ्तार मिलने की उम्मीद

time to read

6 mins

March 04, 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size