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मैनपुरी ने डिम्पल को सौंपी विरासत
DASTAKTIMES
|December - 2022
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की बड़ी हार के पीछे कई कारण हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण जिले की राजनीति में जाति विशेष के नेताओं का दखल ही रहा। यह भी एक तथ्य है कि जिले की राजनीति में ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई ऐसे पद होते हैं, जिन पर पार्टी और सरकार ही जीतती है। लेकिन मैनपुरी में इन सभी पदों के लिए क्षेत्रीय जाति के नेताओं पर भाजपा का हाथ रहा। चाहे ब्लॉक प्रमुख का पद हो, जिला पंचायत अध्यक्ष का पद हो, जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष का पद हो या फिर सूबे की सरकार में मंत्रिमंडल का पद जाति विशेष को ही स्थान मिला। इसके अलावा भाजपा की जिला कार्यकारिणी में भी सर्वोच्च पद जाति विशेष की ही झोली में रहा। इससे भाजपा का कोर वोट बैंक माने जाने वाले ब्राह्मण, वैश्य, लोधी में नाराजगी और बढ़ गयी। नतीजा ताजा चुनाव परिणाम बता ही रहे हैं।
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एक ओर जहां दो राज्यों गुजरात और हिमाचल में विधानसभा चुनाव थे, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में भी एक लोकसभा तथा दो विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए। इनमें से मैनपुरी लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी के संरक्षक एवं उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव के निधन के कारण रिक्त हुई थी।
वहीं रामपुर सदर विधानसभा सीट से सपा के वरिष्ठ नेता मो. आजम खां और मुजफ्फरनगर जिले की खतौली सीट भाजपा विधायक रहे सैनी को विभिन्न प्रकरणों में सजा होने के बाद रिक्त घोषित कर दी गयी थी। उपचुनाव में मैनपुरी में तो वहां की जनता ने मुलायम सिंह यादव की विरासत उनकी ही पुत्रवधू यानि सपा मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव के हाथों में सौंप दी। लेकिन सपा नेता आजम खां रामपुर सदर का अपना किला नहीं बचा पाये और यहां भाजपा के आकाश सक्सेना ने जीत दर्ज की। वहीं खतौली सीट पर राष्ट्रीय लोकदल और सपा प्रत्याशी मदन भैया ने जीत दर्ज की। यह सीट भाजपा ने अभी करीब आठ माह पहले ही जीती थी लेकिन रालोद मुखिया जयंत चौधरी की मेहनत इस बार रंग लायी और वह अपना प्रत्याशी जिताने में कामयाब रहे।
मैनपुरी उपचुनाव में सपा प्रत्याशी डिंपल यादव ने भाजपा प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य को करारी शिकस्त दी है। हालांकि इस सीट पर भाजपा और यूपी की योगी सरकार ने लाख जतन किए कि आजमगढ़ के बाद सपा के इस किले को भी फतह किया जा सके लेकिन ऐसा हो न सका।
Bu hikaye DASTAKTIMES dergisinin December - 2022 baskısından alınmıştır.
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