Denemek ALTIN - Özgür
सही दिशा में बढ़े गाड़ी
Aha Zindagi
|February 2025
लक्ष्य तय कर लेने और अच्छी योजना बना लेने के बावजूद संकल्प की गाडी थम सकती है या ग़लत दिशा में मुड़ सकती है।
यहां लेखक ने अपनी सफलता और विफलता, दोनों के उदाहरण देते हुए कारगर सूत्र दिए हैं कि कैसे निरंतर.....
फिल्म उपकार उपकार के लोकप्रिय गीत की तर्ज़ पर कहें तो 'कसमें, वादे, नववर्ष संकल्प, सब बातें हैं बातों का क्या!' ऐसा इसलिए कि हम सब नए साल पर कुछ संकल्प लेते हैं, लेकिन अधिकांश लोगों के संकल्प जनवरी ख़त्म होते-होते ख़त्म हो चुके हैं, चाहे वह फिटनेस से जुड़ा हो, कोई नई आदत विकसित करने का या कुछ नया सीखने का। दरअसल, हमारे संकल्प या तो देखा-देखी में लिए होते हैं या जोश में। दोनों ही स्थितियों में हम या तो सही संकल्प नहीं लेते या उन संकल्पों को पूरा करने के लिए आगे उचित क़दम नहीं उठाते।
...तब तो नहीं हो पाएगा
बात केवल जोश में क़दम उठाने की नहीं है, होश में उचित क़दम उठाने की है। मेरे एक मित्र का वज़न घटाने का संकल्प था और वे रोज़ उबली सब्ज़ियां खाने लगे। लेकिन 15 दिन में ऐसा ऊबे कि 16वें दिन से उन्होंने मसालेदार खाना शुरू किया और अंततः वज़न पहले से अधिक कर लिया। ध्यान रहे, वज़न आप स्वादिष्ट भोजन के साथ भी घटा सकते हैं, इसलिए उसका तरीक़ा व्यावहारिक रखें, यानी जिसे आसानी से और लंबे समय तक कर सकें। यह बात फिटनेस या स्वास्थ्य ही नहीं, सभी तरह के संकल्पों पर लागू होती है।
हलवा है क्या!
गर्मागर्म हलवा भी एक बार में गपका नहीं जा सकता, छोटेछोटे कौर लेकर, फूंक-फूंककर खाना होता है। ठंडा होने के बाद ही बड़े कौर जल्दी-जल्दी लिए जा सकते हैं। संकल्पों के मामले में भी ऐसा ही होता है : यानी कि अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए दिमाग़ और शरीर को अभ्यस्त करना। आपको बड़े लक्ष्य डराएंगे, इसलिए उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करें और फिर अपने आप को अभ्यस्त करते जाएं।
Bu hikaye Aha Zindagi dergisinin February 2025 baskısından alınmıştır.
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