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युवाओं हेतु आदर्श जीवन का संदेश
Rishi Prasad Hindi
|February 2025
विद्याध्ययन करते हुए आदर्श, विवेक, सारावलोकनी बुद्धि, दूरदर्शी दृष्टि एवं अपने- आपका तथा संसार का ज्ञान प्राप्त करने से पहले जो युवक अधिकार एवं सम्मान लाभ की सिद्धि के लिए दौड़ पड़ते हैं, वे भी दरिद्र ही रह जाते हैं, कोई महत्त्वपूर्ण आदर्श पदाधिकार नहीं प्राप्त कर पाते।
युवावस्था के आरम्भ से ही यदि रजोगुण प्रबल हो जाता तो प्रथम भोगसुख की कामना प्रबल होती है और उसके कारण एवं परिणाम का कुछ भी ज्ञान, ध्यान न रखते हुए वे युवक सुखद शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गंध के द्वारा काम की तृप्ति करने के लिए भोग-भूमि में कूद पड़ते हैं। कुछ युवक इतने शक्तिशाली होते हैं जो कामना की पूर्ति का पक्ष न लेकर शक्ति के विषयोन्मुखी प्रवाह को स्ववश में रखते हैं, उनमें अधिकार और मान की इच्छा प्रबल होने की सम्भावना बढ़ती है। इस अवस्था में आवेश, आवेग, उत्तेजना की प्रबलता रहती है, जिसकी पूर्ति के लिए युवक को संघ-निर्माण, संगठन, प्रचार के क्षेत्र में तीव्र गति से कार्य करना, लड़ना, झगड़ना आदि प्रिय प्रतीत होता है। जो युवक कामनातृप्ति तथा अधिकार एवं मान प्रा
This story is from the February 2025 edition of Rishi Prasad Hindi.
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