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वेदांत संदेश
Rishi Prasad Hindi
|June 2026
पूज्यपाद भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज की पावन अमृतवाणी (३१ अक्टूबर १९५६ शाम को अद्वैत आश्रम, अजमेर की नींव-उद्घाटन के अवसर पर प्रदत्त सत्संग)
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हम जो भी जीव देखते हैं उन सभीके जीने का उद्देश्य सुख, शांति, सच्चा आनंद ही है । जैसे नदियाँ रात-दिन लगातार समुद्र से मिलने के लिए दौड़ती रहती हैं, वैसे ही मनुष्य भी लगातार सिर्फ उस नित्य आनंद, अखंड आनंद में स्थित होने के लिए ही प्रयत्न करता रहता है।
सभी शास्त्रों के सरताज वेदों का लाभ लो
आपने सुना कि आपको हिन्दू साहित्य भंडार से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए । एक समय था जब भारत में वेदवाणी की ध्वनि सुनी जाती थी। वेदवाणी के लिए क्या कहना, यह दिव्य वाणी है। वेदों के ज्ञान के मुकाबले में दूसरा कोई ज्ञान ठहर नहीं सकता। दुनिया में सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद ही हैं । उपनिषद् वेदों के ज्ञान भाग हैं। श्री वेदव्यासजी, पतंजलि, कणाद व दूसरे दार्शनिकों ने उपनिषदों से ही प्रमाण दिये हैं। उपनिषदों में ज्ञान का भंडार भरा हुआ है, वह सुनो ।
आप कहोगे कि सुनने से क्या लाभ होगा ? गुरु नानकजी फरमाते हैं :
सुणिऐ अंधे पावहि राहु ।।
अंधे कौन हैं ? जिनके पास ज्ञानचक्षु नहीं हैं। ऐसे लोगों को रास्ता मिलता है। भक्ति क्या है, योग क्या है, धर्म क्या है, ज्ञान क्या है, परमेश्वर क्या है, जीव क्या है, यह संसार क्या है, साधारण धर्म क्या है, विशेष धर्म क्या है, राजयोग क्या है ? नैमित्तिक कर्म, काम्य कर्म, अध्यात्म कर्म, अधिदैव कर्म, अद्भुत कर्म क्या हैं ? श्रवण ज्ञान, मनन ज्ञान, साक्षात् ज्ञान क्या है ? इन सब बातों को सुनने पर ज्ञान होता है। सुनते-सुनते अज्ञानियों को जानकारी होती है कि कर्तव्य क्या है व अकर्तव्य क्या है । क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। माताएँ, देवियाँ - सबको जानकारी होती है, ज्ञान प्राप्त होता है, इसलिए सुनो ।
सुणिऐ सासत सिम्रिति वेद ।
पहले आपने सुना कि वेद सभी ग्रंथों के सरताज हैं । हिन्दू साहित्य भंडार में ४५७८ मुख्य ग्रंथ हैं । वेद उन्हीं सभी शास्त्रों के सरताज हैं । इसलिए गुरु नानकदेवजी ने भी पहले वेदों का नाम लिया है । उन वेदों की वाणी सुनो । दूसरे शास्त्र, षड्दर्शन (६ शास्त्र) भी सुनो । श्रवण करो, स्मृतियाँ सुनो । याज्ञवल्क्य आदि स्मृतियों का, गीता का श्रवण करो, इससे आपके भ्रम दूर होंगे।
आत्मबोध क्यों व कैसे ?
This story is from the June 2026 edition of Rishi Prasad Hindi.
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