Facebook Pixel बीस साल बाद संगम | Outlook Hindi - news - Read this story on Magzter.com
Go Unlimited with Magzter GOLD

Go Unlimited with Magzter GOLD

Get unlimited access to 10,000+ magazines, newspapers and Premium stories for just

$149.99
 
$74.99/Year

Try GOLD - Free

बीस साल बाद संगम

Outlook Hindi

|

August 04, 2025

ठाकरे बंधु आखिर एक मंच पर क्यों आए? क्या महज मराठी भाषा ही साझा मकसद है या आसन्न बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव में पैठ बढ़ाने का यह बहाना है? क्या यह टिकाऊ है या बस अपनी चुनावी ताकत वापस पाने भर का मामला

- जिनित परमार और तृषा मजूमदार

बीस साल बाद संगम

महाराष्ट्र या कहें मराठी राजनीति में एक नया घटनाक्रम 5 जुलाई को मुंबई के एनएससीआइ मैदान में देखा गया, जहां बाला साहेब ठाकरे की राजनीति की विरासत के झंडे तले बीस बरस बाद चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे विशाल भीड़ के सामने मंच पर आए। प्रत्यक्ष मौका तो राज्य में प्राथमिक विद्यालयों में विवादास्पद त्रि-भाषा नीति को वापस लेने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले का जश्न मनाने का था।

इस कदम को राज्य में हिंदी थोपे जाने की तरह देखा जा रहा था। मुंबई के वर्ली में इस 'विजय' रैली में उद्धव ने इशारा किया कि आगामी नगर निगम चुनाव साथ मिलकर लड़ा जा सकता है। भारी भीड़ के बीच उद्धव ने कहा, “हम साथ रहने के लिए साथ आए हैं। हम मिलकर मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र में सत्ता हासिल करेंगे। हमारी ताकत हमारी एकता में होनी चाहिए। जब भी कोई संकट आता है तो हम एक साथ आ जाते हैं।”

उद्धव शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे के पुत्र हैं और राज उनके भाई श्रीकांत ठाकरे के पुत्र हैं। ये दोनों आखिरी बार 2005 में मालवण विधानसभा सीट के लिए प्रचार के लिए एक मंच पर थे। उसके बाद दोनों के बीच मतभेद शिवसेना में बाला साहेब ठाकरे की विरासत को लेकर हुआ था। झगड़ा इतना बढ़ा कि 2005 में ही राज ठाकरे को पार्टी छोड़नी पड़ी। उन्होंने 2006 में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की स्थापना की और तब से दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती रही हैं। लेकिन बीस साल बाद वे प्रत्यक्ष तौर पर महाराष्ट्र की भाषाई पहचान के मुद्दे के लिए एकजुट हुए हैं। लेकिन संकेत है कि वे आसन्न बृहन्मुंबई नगर निगम और महाराष्ट्र में अन्य चुनाव मिलकर लड़ सकते हैं।

महाराष्ट्र के राजनैतिक परिदृश्य में ठाकरे परिवार की लंबी विरासत है। यह विरासत केशव ठाकरे से जुड़ी है, जिन्हें प्रबोधनकर ठाकरे के नाम से जाना जाता है। वे संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के प्रमुख नेता थे, जिसके कारण भाषाई आधार पर राज्य का निर्माण हुआ। दोनों भाइयों को विरासत तो जोड़ती है, लेकिन दोनों की सियासत अलग-अलग है।

MORE STORIES FROM Outlook Hindi

Outlook Hindi

Outlook Hindi

कीमत वसूलती है शोहरत

कम उम्र में मशहूर क्रिकेटर बनने की चुनौतियां संभालना मुश्किल, इसलिए मार्गदर्शन की दरकार

time to read

4 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

अब मिशन 2027 का आगाज

पश्चिम बंगाल और असम विजय के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश और पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी

time to read

4 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

स्त्री राग का धमाल

मुंबई के अंडरग्राउंड सर्किट से लेकर कराची के कुछेक मंचों तक लड़कियां, महिलाएं हिप-हॉप को अपनी धुन में ढाल रहीं, दक्षिण एशिया में रैप के लय, ताल और ढंग को बदल रहीं

time to read

6 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

लारा का अंदाज सोबर्स की शैली

महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने न सिर्फ जांबाज बल्लेबाजी के लगभग सारे रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि खेलने के अलग- अलग अंदाज भी ईजाद किए

time to read

6 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

बस लीक ही लीक!

लगातार प्रश्न-पत्रों के लीक के बावजूद एजेंसी की सेहत पर कोई फर्क नहीं, आखिर ऐसे घोटालों से लाखों के जीवन से खिलवाड़ और कई खुदकशियों का जिम्मेदार कौन

time to read

8 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

जनादेश और एसआइआर का साया

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एसआइआर प्रक्रिया का भाजपा की जीत में असर से इनकार करना मुश्किल, मगर सिर्फ ये ही इकलौती वजह नहीं

time to read

6 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

भगवा शुभंकर शुभेंदु

कांथी की सड़कों से लेकर राइटर्स बिल्डिंग तक नए मुख्यमंत्री का सफर कांग्रेसी विरासत, ध्रुवीकरण, टकरावों के जरिए पहचान बनाने और ऊंची कुर्सी की महत्वाकांक्षा की मिसाल

time to read

3 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

नासिक कुंभ पर अर्थ संकट

नासिक नगर निगम ने भाजपा के लिए महत्वाकांक्षी आयोजन के लिए पैसे की तंगी के मद्देनजर अपने कदम पीछे खींचे

time to read

4 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

अडसिल में पकती उम्मीदें

निर्वासन में जन्मे, चेन्नै में अपना वजूद खोजते श्रीलंकाई शरणार्थियों को एक सामुदायिक रेस्तरां से मिल रही उम्मीद

time to read

5 mins

June 2026

Outlook Hindi

Outlook Hindi

सतीशन के सिर सरोपा

तकरीबन दस दिनों की कवायद के बाद कांग्रेस आलाकमान जबरदस्त जन दबाव के आगे झुका और मुख्यमंत्री की कुर्सी उस नेता को मिली, जिसने राज्य में कांग्रेस को फिर खड़ा किया

time to read

4 mins

June 2026

Listen

Translate

Share

-
+

Change font size