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ज़रा-सी चींटी

Aha Zindagi

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October 2025

किसी को कमज़ोर, तुच्छ और निरर्थक बताने के लिए चींटी की उपमा दी जाती है। 'चींटी की तरह मसल देना' या 'चींटी के भी पर निकल आए हैं' जैसे मुहावरे इस मानसिकता की बानगी हैं। लेकिन ठहरिए! महज दो पन्नों के इस तथ्यात्मक लेख को पढ़ लेने के बाद चींटी को लेकर आपकी धारणा निश्चित रूप से बदल जाएगी।

- रेणु जैन

ज़रा-सी चींटी

चींटी आंखों से दिखाई देने वाले सबसे छोटे जीवों में से एक है। ऊपर से वह जितनी मामूली-सी लगती है, उसकी अंदरूनी क्षमताएं उतनी ही चौंकाने वाली हैं। किंवदंती तो यहां तक है कि यही नन्हीं चींटी धरती के सबसे बलशाली जीव हाथी को भी परेशान कर सकती है। माना जाता है कि इसी डर से गजराज चलते समय बार-बार फूंक मारते हैं, ताकि कोई चींटी उनकी सूंड में न घुस पाए। अब यह सच है या सिर्फ़ मान्यता, कहना मुश्किल है—पर भारत में ऐसी कहानियां पीढ़ियों से सुनाई जाती रही हैं। लेकिन चींटियों की दुनिया महज़ मान्यताओं तक सीमित नहीं, उनकी शक्तियां वास्तविक हैं।

सर्जरी में माहिर हैं कारपेंटर चींटियां

हाल ही में अमेरिका में हुई खोज ने चींटियों की एक और अहम योग्यता का पता दिया। वैज्ञानिकों ने पाया कि वहां पाई जाने वाली 'कारपेंटर एंट्स' यानी बढ़ई चींटियां अपने साथियों की चोट को पहचान लेती हैं और उनका इलाज भी करती हैं। वे घाव को साफ़ करती हैं, संक्रमण से बचाती हैं और ज़रूरत पड़ने पर सर्जरी तक कर डालती हैं! ख़ास बात यह है कि वे अपने शरीर से निकलने वाले एंटी-माइक्रोबियल पदार्थ का इस्तेमाल करती हैं, जिससे घाव जल्दी भरने लगता है। अगर चोट बहुत गंभीर हो और साथी के बचने की उम्मीद कम लगे तो ये चींटियां बिना झिझक उसका अंग काटकर अलग कर देती हैं। सुनने में यह कठोर ज़रूर लगता है, लेकिन यही तरीक़ा उनकी जान बचा देता है। शोध बताता है कि जिन चींटियों के बचने की संभावना पहले 40 प्रतिशत से भी कम थी, सर्जरी के बाद उनकी जीवित रहने की संभावना 90 से 95 प्रतिशत तक पहुंच गई। सोचिए, जिस इंसान को सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा विधि विकसित करने में सदियां लग गईं, वही काम यह नन्ही-सी चींटी अपनी सहज प्रवृत्ति से करती है। इंसान के बाद सर्जरी करने की क्षमता रखने वाले जीवों की सूची में नाम दर्ज कराने वाली यह शायद इकलौती प्रजाति है।

एक इंसान और 25 लाख चींटियां

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