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सामाजिक आदर्श का प्रतीक बने कुम्भ मेला
Sadhana Path
|January 2025
स्नान, दान का महापर्व कुम्भ आस्था का ऐसा मेला है जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जन पहुंचते हैं। मेला किन अर्थों में महत्त्वपूर्ण व किस प्रकार सामाजिक आदर्श का प्रतीक बन सकता है। आइए जानते हैं लेख से।
अनेकता में एकता के वाहक देश भारत को पर्वों का देश कहा जाता है। भारतीय पर्वों की लंब सूची में स्नान पर्वों का विशेष महत्त्व है। इन्हीं स्नान पर्वों में शामिल है कुम्भ पर्व। समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त अमृत के लिए जब देवताओं तथा राक्षसों में टकराव हुआ तो देवता अमृत की रक्षा के लिए विभिन्न कंदराओं में छिपे। उसी दौरान अमृत की कुछ बूंद जिन चार स्थानों पर गिरीं, वहां कुम्भ नामक पर्व मनाया जाता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि अमृत कलश कुछ बूंदे, जिन स्थानों पर गिरीं, उनमें से अमृत की , इलाहाबाद (अब प्रयागराज, उ. प्र.), नासिक-त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र), उज्जैन (म. प्र.) तथा हरिद्वार (उ.प्र.) का समावेश है। उत्तर प्रदेश की प्रमुख धार्मिक नगरी इलाहाबाद में जिसे कुछ दिनों पहले ही प्रयागराज नाम दिया गया है, में इस वर्ष अर्धकुम्भ का आयोजन किया जाएगा। मकरसंक्रांति (14 जनवरी) से शुरू होने वाला यह अर्धकुम्भ मेला शिवरात्रि (4 मार्च) को समाप्त होगा। कुम्भ मेले में शाही स्नान की परंपरा का अनुपालन प्रयागराज में होने वाले अर्धकुम्भ में भी किया जाएगा। इसके तहत 14 तथा 15 जनवरी, 2019 को पहला शाही स्नान होगा, जबकि 4 फरवरी, 2019 को मौनी अमावस्या के दिन दूसरा शाही स्नान होगा। वसंत पंचमी के दिन 10 फरवरी को तीसरा, माघी एकादशी के दिन 16 फरवरी को चौथा, 19 फरवरी माघी पुर्णिमा को पांचवां तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर 4 मार्च को छठवां शाही स्नान होगा। इन सभी शाही स्नानों में एक बात बड़ी प्रखरता से देखने को मिलेगी कि नदी के तट पर भेदभाव भूल कर सभी एक साथ आस्था की डुबकी लगाते हुए दिखाई देंगे। कुम्भ पर्व पर आस्था की डुबकी लगाने वालों में सभी वर्गों के लोगों का समावेश रहता है। कुम्भ के दौरान होने वाले शाही स्नान में नागा साधुओं का विशेष महत्त्व होता है, ये शाही स्नान का मुख्य आकर्षण होते हैं। कुम्भ स्नान में नागा साधुओं को विशेष महत्त्व इसलिए दिया जाता है, क्योंकि इन्हें भगवान शिव का प्रतिनिधि माना जाता है, इसलिए पहले नागा साधु स्नान करते हैं, उसके बाद अन्य लोगों को स्नान करने का अवसर दिया जाता है।
एकता का परिचायक
This story is from the January 2025 edition of Sadhana Path.
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