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टाइगरू का बाथरूम एडवेंचर
Champak - Hindi
|December First 2025
टाइगरू को नहाना इतना पसंद था कि एक बार बाथरूम में घुसने के बाद, बाहर आने का उस का मन ही नहीं करता था.
आज भी कुछ अलग नहीं था. डंपी बंदर दरवाजे पर बेसब्री से उस के बाहर निकलने का इंतजार कर रहा था.
वह चिल्लाया, “टाइगरू, हमें देर हो रही है. जैबी जिराफ ने पहले ही गाड़ी स्टार्ट कर दी है. क्या हम जंगल निरीक्षण के लिए नहीं जा रहे हैं?”
टाइगरू अंदर शैंपू के बुलबुलों की दुनिया में खोया हुआ था. शावर की आवाज इतनी तेज थी कि उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. उस ने बस आलस से कहा, “तुम जो चाहो करो, मुझे अभी थोड़ा और समय लगेगा.”
डंपी थोड़ा नादान था. उस ने टाइगरू के कहने का मतलब निकाला, “तुम जंगल घूमने जाओ.”
उत्साह से उस ने अपनी नोटबुक उठाई और जीप की तरफ दौड़ा. “जैबी, आज सिर्फ हम ही हैं. टाइगरू ने कहा था कि उसे थोड़ा समय लगेगा,” डंपी ने गर्व से अपनी नोटबुक लहराते हुए कहा.
जैबी ने सिर हिलाया और तेजी से गाड़ी स्टार्ट कर जंगल की तरफ चल दिया.
बाथरूम में, टाइगरू ने आखिरकार अपना लंबा स्नान पूरा किया और खुशी से आह भरी. अचानक, वह हांफते हुए बोला, “अरे नहीं, मैं शावरजेल तो लगाना भूल ही गया.”
उस ने जल्दी से खुद पर ढेर सारा शावरजेल लगाया और शावर को और भी तेजी से चालू कर दिया. वह पानी की लय के साथ खुशी से गुनगुनाने लगा.
लेकिन जल्द ही उसे अपने पैरों के पास कुछ अजीब सा महसूस हुआ. “यह क्या है? पानी मेरे घुटनों तक पहुंच गया है. क्या मैं किसी तालाब में नहा रहा हूं?”
उस ने नीचे देखा, नाली पूरी तरह से जाम हो चुकी थी. उस ने उसे लात मारने की कोशिश की, फिर पंजे से खींचा, लेकिन कुछ भी काम न आया. नाली पूरी तरह से जाम हो चुकी थी.
अब उसे चिंता होने लगी. उस ने शावर बंद करने की कोशिश की. लेकिन शावर की नौब ही नहीं हिली.
शायद शावरजेल की वजह से उस के हाथ बहुत फिसलन भरे हो गए थे, उस ने हाथ पोंछ कर साफ किया और फिर नौब को बंद करने की कोशिश की. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. शावर भी टूटा हुआ था.
वह चिल्लाया, “डंपी, अरे ओ डंपी.”
लेकिन डंपी अब तक जैबी के साथ बहुत दूर जा चुका था.
‘अब मैं क्या करूं?’ उस ने सोचा. उस ने बाथरूम का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुला.

This story is from the December First 2025 edition of Champak - Hindi.
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