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गोलगप्पों के स्वाद का रहस्य
Champak - Hindi
|February First 2025
"ओह, पूरा एक सप्ताह और इस ठंडे मौसम में बिताना होगा,” प्रिया ने अपने दांत किटकिटाते हुए कहा और अपना स्वेटर कस कर अपने चारों ओर खींच लिया.
"इसे रेफ्रिजरेटर में एक सप्ताह बिताने जैसा समझो," अमिता ने आंख मारते हुए उसे धक्का दिया. प्रिया ने अपनी चचेरी बहन को घूर कर देखा.
"लो, मैं कार का हीटर चालू कर देता हूं,” सुंदर अंकल ने हंसते हुए स्टेयरिंग घुमाया और उन्हें घर ले गए. प्रिया के मातापिता कामकाजी थे और अगर बच्चों को अकेले रहना पड़ता तो सर्दियों की छुट्टियां लंबी और उदास लगतीं. इसलिए यह व्यवस्था की गई थी.
सुंदर अंकल ने से कहा, “तुम लड़कियों को अकेले आवासीय परिसर से बाहर नहीं जाना चाहिए. बगीचे में खेलो, लेकिन समय पर खाना खाओ."
"लेकिन गोल जी अप्पाआआ?” अमिता ने कराहते हुए कहा.
"गोल अप्पा?” प्रिया चौंक गई. हां, सुंदर अंकल गोल 'लड्डू जैसे दिखते थे, एक फूली हुई गेंद की तरह, लेकिन क्या उन्हें 'गोलअप्पा' कहना असभ्य नहीं था? क्या अमिता अपने पिता का मजाक उड़ा रही थी?
सुंदर चाचा मुसकरा रहे थे. “ठीक है, हम गोलगप्पों के लिए छूट दे सकते हैं."
वे क्या बात कर रहे थे? प्रिया ने अमिता की आस्तीन खींची, गोल अप्पा या गोलगप्पा?" उस ने पूछा.
अमिता ने प्रिया को चुप कराया और अपने पापा ओर हाथ बढ़ा कर कुछ पैसे मांगे. प्रिया की आंखें चौड़ी हो गईं, जब उस ने देखा कि सुंदर अंकल उसे कुछ पैसे दे रहे हैं. क्या वह चिढ़ाने के बदले में पैसे दे रहे थे?
"चलो, चलें," अमिता ने प्रिया का हाथ पकड़ा और उसे अपने विशाल अपार्टमेंट परिसर के गलियारों से होते हुए, खेल के मैदान से आगे, खुली हवा वाली गैलरी से निकलते हुए बाहर ले गई.
मीटर बाहर एक अंततः वे गेट से कुछ रेहड़ी वाले के सामने रुकीं."एक प्लेट में गोलगप्पे दो,” उत्साहित अमिता ने दुकानदार से कहा. तुरंत ही दो उथले कागज के दोने उन के हाथों में थमा दिए गए.
This story is from the February First 2025 edition of Champak - Hindi.
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