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पहलगाम प्रतिशोध
Jansatta
|May 11, 2025
कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को चुनिंदा पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के लिए एक प्रभावी और साफ संदेश देने वाली निवारक प्रतिक्रिया की जरूरत थी। सवाल यह था कि वह किस स्तर की प्रतिक्रिया हो? 'बदला' और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई के लिए राष्ट्रवादी आह्वान किए गए। बहुत कम लोगों को एहसास हुआ कि इसका जवाब भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्ण युद्ध नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरुआती दिनों में हस्तक्षेप किया था और 16 सितंबर, 2022 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था, 'यह युद्ध का युग नहीं है'। इन शब्दों ने नरेंद्र मोदी को पूरी दुनिया में गर्मजोशी से भरी तालियां दिलाई थीं; भारत में भी उन्होंने अपने लिए एक राजनेता और शांतिदूत के रूप में प्रशंसा हासिल की।
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दुनिया के कई देशों ने इन शब्दों को याद किया और निजी तौर पर भारत को इसी मुताबिक सलाह दी। युद्ध शुरू न करने के अन्य कारण भी थे: पहला, रूस-यूक्रेन संघर्ष या इजराइल हमास संघर्ष के विपरीत, भारत-पाकिस्तान टकराव में दोनों पक्ष परमाणु शक्ति से लैस थे और उनके पास परमाणु हथियार थे। दूसरा, दुनिया युद्ध के प्रति असहिष्णु हो गई है। मौजूदा दौर में चल रहे दो बड़े युद्धों में यूक्रेन में अब तक 13,000 और गाजा में 50,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि रूस और इजराइल में सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं। दो परमाणु शक्तियों के बीच एक और बड़ा युद्ध दुनिया की स्थिरता और अर्थव्यवस्था को विनाश के कगार पर ला सकता था।
बुद्धिमानी भरा फैसला
प्रधानमंत्री मोदी ने इन बाधाओं को समझा और बुद्धिमानी से चुनिंदा लक्ष्यों तक सीमित सैन्य प्रतिक्रिया का विकल्प चुना। मंगलवार, 7 मई, 2025 को भारतीय सेना ने नौ लक्ष्यों (पाकिस्तान में चार और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पांच) को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन छोड़े और आतंकवादी समूहों के मुख्य बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया। यह सोच-समझ कर चलाया गया सीमित अभियान था- पैमाने और समय दोनों के लिहाज से- और इसने अपने उद्देश्यों को हासिल किया। यह एक पीड़ित देश की वैध प्रतिक्रिया थी।
Denne historien er fra May 11, 2025-utgaven av Jansatta.
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