कोशिश गोल्ड - मुक्त

भारत-रूस संबंधों के नए आयाम

Jansatta

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December 26, 2025

पिछले कुछ समय से दुनिया में शक्ति-संतुलन बदल रहा है। ऐसे में भारत-रूस के बीच शीर्ष-स्तरीय संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संकेत है कि दोनों देश अपनी सामरिक साझेदारी को नई ऊर्जा देना चाहते हैं।

- धीरज यादव

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा ऐसे समय में हुई, जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पिछले कुछ समय से दुनिया में शक्ति-संतुलन बदल रहा है और विभिन्न देशों की विदेश नीतियों में नई प्राथमिकताएं आकार ले रही हैं। ऐसे में भारत और रूस के बीच शीर्ष-स्तरीय संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि यह संकेत है कि दोनों देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी सामरिक साझेदारी को नई ऊर्जा देना चाहते हैं।

पुतिन की यह यात्रा इस बात की पुष्टि करती है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित रखते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलित और सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस यात्रा का महत्त्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि विश्व स्तर पर यूक्रेन युद्ध, रूस और पश्चिम देशों के बीच तनाव, रूस-चीन नजदीकी और अमेरिका की नई व्यापार नीतियां मिलकर एक जटिल भू-राजनीतिक वातावरण बना रही हैं। भारत, जो आज वैश्विक दक्षिण की प्रमुख आवाज बनकर उभरा है, ऐसी स्थिति में अपनी विदेश नीति में परिपक्वता और संतुलन दोनों का परिचय दे रहा है। पुतिन की यात्रा का सार यही रहा कि भारत किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने हितों और मूल्यों के अनुरूप निर्णय लेता है।

भारत और रूस के संबंधों की नींव शीत युद्ध काल में पड़ी थी। वर्ष 1971 की भारत-सोवियत मैत्री संधि ने दोनों देशों के बीच ऐसे विश्वास का निर्माण किया, जिसे समय और सत्ता परिवर्तन भी कमजोर नहीं कर सके। रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और विज्ञान-तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत होता गया। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को आकार देने में रूसी वैज्ञानिक सहयोग निर्णायक रहा। रक्षा क्षेत्र में भी द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार हुआ है। भारतीय सेना के लगभग 60-70 फीसद उपकरण किसी न किसी रूप में रूसी तकनीक पर आधारित हैं। एसयू-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान, टी-90 टैंक, एस-400 मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी संयुक्त परियोजनाएं इस विश्वास का प्रमाण हैं। यही ऐतिहासिक संबंध आज भी दोनों देशों को एक-दूसरे की सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं के प्रति संवेदनशील बनाए रखते हैं।

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