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गर्दिश में 'आवारा'

Jansatta Lucknow

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January 18, 2026

ज कपूर की फिल्म 'आवारा' का गीत, 'आवारा हूं, या गर्दिश में हूं, आसमान का तारा हूं' ने सड़कों की जिंदगी को एक रुमानियत दी थी।

भारतीय शहरों में यह रुमानियत सड़कों पर कुत्तों को लेकर भी उमड़ी। आवारा कुत्तों को खिलाने व उनकी देखभाल करने का एक बड़ा तबका तैयार हुआ। जल्द ही यह रुमानियत खौफ में बदल गई, जब आवारा कुत्तों के काटने से लोगों की जान पर बन आई। क्या बच्चे और बड़े, सभी आवारा कुत्तों के काटने के शिकार हुए। भारत में बढ़ते

भारत में कम से कम छह करोड़ आवारा कुत्ते हैं। हालांकि, साल 2019 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार ऐसे कुत्तों की संख्या 1.53 करोड़ है। सर्वेक्षणों में अकेले दिल्ली में लगभग 10 लाख कुत्ते पाए गए। इसी से संबंधित एक और तथ्य यह है कि वैश्विक स्तर पर रेबीज से होने वाली मौत में से एक तिहाई से अधिक भारत में होती हैं।

ज्यादातर पश्चिमी देशों के विपरीत, भारतीय संस्कृति और कानून कुत्तों को मारने पर रोक लगाते हैं। इसके बजाय, कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनका बंध्याकरण किया जाता है, उन्हें टीका लगाया जाता है और सबसे अहम यह है कि उन्हें उनके मूल क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाता है।

अगस्त 2025 में हालात बदल गए। कई बच्चों को आवारा कुत्तों ने नोच डाला। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के सभी आवारा कुत्तों को पकड़ कर आश्रय स्थलों या पशुशालाओं में रखने का संक्षिप्त आदेश दिया और दशकों में पहली बार सड़कों को कुत्तों से मुक्त करने का वादा किया। हालांकि यह आदेश अव्यावहारिक था। लाखों कुत्तों के लिए आश्रय स्थल होना असंभव है। इसका पशु अधिकार समूहों की ओर से तीखा विरोध हुआ। दो दिन के भीतर, अदालत ने अपना फैसला पलट दिया और लंबे समय से चली आ रही बंध्याकरण नीति को बहाल कर दिया।

बाद के फैसलों ने इस विषय पर ध्यान केंद्रित किया है। नवंबर 2025 में अदालत ने देश भर के स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक परिवहन क्षेत्रों से कुत्तों को हटाने का आदेश दिया। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाया और उन्हें दूर रखने के लिए बाड़ लगाने को प्रोत्साहित किया।

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