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देश के लिए लाभदायक है नियंत्रणों का हटना
Business Standard - Hindi
|January 07, 2026
एक-एक कर सावधानीपूर्वक नियंत्रण हटाने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़े लाभ हासिल हो रहे हैं। बता रहे हैं अजय शाह
भारत के लिए समृद्धि का रास्ता मुक्त बाजार वाली अर्थव्यवस्था बनने से खुलता है। ऐसी अर्थव्यवस्था जो दुनिया के साथ गहराई से जुड़ी हो। फिलहाल तो सीमाओं पर प्रतिबंधों की भूलभुलैया है, जो इस जुड़ाव में बाधा डालती है। भारतीय राज्य ने कई हस्तक्षेप निर्मित किए हैं। उदाहरण के लिए पूंजी नियंत्रण, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, क्षेत्र-विशिष्ट निषेध, भुगतान में समस्याएं, प्रक्रियात्मक बोझ आदि जो उन लोगों के हाथ बांध देते हैं जो सीमा पार अवसर तलाशने की कोशिश करते हैं। ये प्रतिबंध भले ही नियंत्रण की इच्छा या अस्थिरता के डर से पैदा हुए हों, लेकिन दुनिया के साथ लेन-देन को कठिन बनाकर हम अपने ही हितों को नुकसान पहुंचाते हैं।
यह देखना उल्लेखनीय है कि इन प्रतिबंधों को हटाने का कितना प्रभावशाली असर हो सकता है। जब हम एक बाधा को भी हटाते हैं, तो आर्थिक प्रतिक्रिया अक्सर तेज और अहम हो जाती है। 2025 के आर्थिक आंकड़ों में दिखी उल्लेखनीय भिन्नता इसका एक अध्ययन प्रस्तुत करती है। भारत के लिए 2025 का व्यापक आर्थिक परिदृश्य मिश्रित रहा। अक्टूबर 2025 तक शुद्ध एफडीआई प्रवाह अच्छे नहीं दिख रहे थे। वैश्विक विनिर्माण कंपनियां, 'चीन+1' की चर्चा के बावजूद, भारत में दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं को लेकर सतर्कता बरत रही थीं। व्यापार करने में आने वाली दिक्कतें अब भी एक बड़ा अवरोध बनी हुई हैं।
एक ओर जहां कारखानों को प्रतिकूल हालात का सामना करना पड़ा वहीं भारतीय वित्त को वैश्विक रणनीतिक पूंजी की नजर में मजबूती हासिल हुई है। वर्ष2025 में भारतीय बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ा। कैलेंडर वर्ष में करीब 11 अरब अमेरिकी डॉलर के सौदे हुए। भारत में शुद्ध एफडीआई एक दशक से अधिक समय से ठहरा हुआ है। इसके बावजूद कुछ नियमों में बदलाव के कारण एक कैलेंडर वर्ष में वित्तीय कंपनियों में बड़ी मात्रा में पूंजी देश में आई। यह पूंजी खाते के नियंत्रण के हटने की शक्ति है। केवल एक क्षेत्र में देखा गया 11 अरब डॉलर का यह प्रवाह भारत में पूरे 2024-25 के दौरान आए शुद्ध एफडीआई (29 अरब डॉलर) की तुलना में बहुत अच्छा है।
Esta historia es de la edición January 07, 2026 de Business Standard - Hindi.
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