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300 करोड़ के लिए अफसर बहू बनी कातिल
Manohar Kahaniyan
|July 2024
उस समय सुबह के करीब 11 बज रहे थे, तारीख थी 22 मई, 2024. डा. मनीष पुत्तेवार अपने हौस्पिटल में वार्ड का दौरा कर रहे थे, तभी उन के फोन की घंटी बजी. उन्होंने फोन में देखा तो काल चंद्रपुर में रहने वाले उन के बड़े भाई डा. हेमंत की थी.
"हां बड़े भैया, आज सुबहसुबह कैसे फोन किया?" डा. मनीष ने काल रिसीव करते हुए पूछा.
"मनीष एक दुखद सूचना है. मुझे अभी अभी अजनी थाने से फोन आया है कि पापा का बालाजी नगर में एक कार से ऐक्सीडेंट हो गया है. मैं नागपुर के लिए निकल रहा हूं. तुम भी सीधे अजनी थाने पर पहुंचो," डा. मनीष के बड़े भाई हेमंत ने रोते हुए कहा.
"भैया, आप रो क्यों रहे हैं ? मैं अभी वहां पर जा कर देखता हूं. अभी थोड़ी देर पहले ही तो पापा यहां पर मम्मी से मिल कर गए हैं. आप बिलकुल भी चिंता मत करो, मैं उन्हें अभी अपने हौस्पिटल ले कर आता हूं." डा. मनीष ने कहा.
"भाई, मनीष हमारे पापा अब नहीं रहे. मुझे अभी अभी थाने से यही खबर मिली है. भाई, मैं आप मम्मी के बारे में पापा से उन की तबीयत के बारे में पूछ रहा था, तभी दूसरी ओर से मुझे पुलिस द्वारा यह दुखद समाचार मिला है. कोई कार वाला पापा को कुचल कर भाग गया." कह कर हेमंत फिर से फूटफूट कर रोने लगे.
"भाईसाहब, मुझे तो कभी ऐसी सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि हमारे पापा हम सब को ऐसे छोड़ कर चले जाएंगे. आप फिक्र मत कीजिए, अपना ध्यान रखिएगा. मैं तुरंत अजनी थाने पहुंच रहा हूं," कहते हुए मनीष ने काल डिसकनेक्ट कर दी.
डा. मनीष पी. पुत्तेवार अजनी पुलिस स्टेशन पहुंचे तो अब तक पुलिस राहगीरों की मदद से पुरुषोत्तम को सरकारी अस्पताल ले गई। थी, परंतु चोट इतनी घातक थी कि अस्पताल ले जाते हुए उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था. अजनी थाने के सीनियर इंसपेक्टर अशोक भंडारे डा. मनीष को अपने साथ ले कर घटनास्थल पर भी गए.
वहां सड़क पर चारों तरफ खून ही खून बिखरा हुआ था. डा. मनीष पुत्तेवार की तहरीर पर अजनी थाने में भादंवि की धारा 304 (ए) के तहत ऐक्सीडेंट का मामला दर्ज कर लिया गया और अज्ञात हत्यारे और अज्ञात कार की तलाश में पुलिस जुट गई.
उधर पुलिस ने लाश का पंचनामा बना कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और पोस्टमार्टम के बाद पुरुषोत्तम के शव को उन के परिजनों को सौंप दिया. 23 मई, 2024 को उन का अंतिम संस्कार भी कर दिया.
बड़े बेटे को क्यों आई षडयंत्र की बू
Esta historia es de la edición July 2024 de Manohar Kahaniyan.
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