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हमारी अस्मिता का प्रतीक सोमनाथ
Kendra Bharati - केन्द्र भारती
|February 2023 Issue
कन्हैयालाल मुंशी गुजरात की पहचान बताते हुए कहते हैं कि, “गुजरात एक भावुक लेकिन जीवित संस्कारी व्यक्तित्व है।
गुजरात की वैयक्तिकता की चेतना से प्रेरित होकर जिसने भी इसकी वैयक्तिकता को सिद्ध करने के लिए सक्रिय रूप से संकल्प लिया है, उसमें गुजरात की पहचान है। इस व्यक्तित्व के निर्माण में पर्वतों और नदियों का स्थान गौण है। मुख्य स्थान उन महापुरुषों का है जिन्होंने गुजरात की यह भावना उत्पन्न की उनके पराक्रम या साहित्यिक रचनाएं गुजरातियों की कल्पना और इच्छा पर ध्यान केन्द्रित करती हैं। यह इतिहास ग्रा सिद्धान्त रचता जाता है। उत्साह और आनंद प्रेरित करता है। गौरव गाथाएं हो जाती हैं। गुजरात का सूक्ष्म शरीर भी वह बनाता है।”
भारत के एक हिस्से के रूप में गुजरात की के पहचान का विशुद्ध मूल उसकी आभ्यात्मिकता है। यहाँ के शूरवीरों, शासकों, दानदाताओं, व्यापारियों, साहित्यिक और सांस्कृतिक नायकों और आम लोगों के व्यवहार में सहजता, सरलता, ज्ञान और व्यापक दृष्टिकोण के दर्शन होते हैं। उसकी जड़ें इस भूमि की गौरवशाली विरासत में हैं। उन्नीसवी शताब्दी के बाद की बात करें तो भी हमें नरसिंह, मीरा, दयानन्द सरस्वती, सहजानन्द स्वामी, आचार्य हेमचन्द्राचार्य सहित अनेक प्रसिद्ध और गुमनाम आध्यात्मवादियों का प्रकाश प्राप्त होता है। उसके बाद आध्यात्म क्षेत्र में विभूतियों के नामों के पन्ने भरे जा सकते हैं और यह समृद्धि ही गुजरातियों के गौरव का मूल बिन्दु है। राष्ट्रीय शायर झवेरचंद मेवानी ने नगर, वन, खेत और गांव-गांव जाकर वीर कथाओं को उजागर कर गुजरात की बड़ी सेवा की है।
This story is from the February 2023 Issue edition of Kendra Bharati - केन्द्र भारती.
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