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पश्चिम एशिया में नई चुनौती
Dainik Jagran
|June 16, 2025
ईरान-इजरायल युद्ध में भारत के लिए बेहतर यही होगा कि वह शांति एवं कूटनीतिक विकल्पों की वकालत करता रहे, लेकिन उसे खुद भी हर तरह की स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा
ईरान पर इजरायल के हमले और फिर ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में तनाव को और भड़का दिया है। पहले इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और विज्ञानियों को निशाना बनाया तो जवाब में ईरान ने तेल अवीव सहित कई बस्तियों पर खतरनाक हमले किए। यह हिंसक टकराव किस मोड़ पर और कब तक समाप्त होता है, उसे लेकर तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना तय है कि इसने भारतीय विदेश नीति के समक्ष एक बड़ी दुविधा उत्पन्न कर दी है। इजरायल के साथ भारत के रक्षा से लेकर तकनीक तक व्यापक हित जुड़े हुए हैं। वहीं, ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। भारत में करोड़ों शिया मुस्लिम रहते हैं और ईरान को शिया समुदाय का वैश्विक नेता माना जाता है। इसके अतिरिक्त, ईरान ऊर्जा संसाधनों से भी संपन्न है। चाबहार बंदरगाह की क्षमताओं को पूरी तरह भुनाए न जा सकने के बावजूद वह कनेक्टिविटी की एक अहम कड़ी है।
This story is from the June 16, 2025 edition of Dainik Jagran.
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