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घोड़ा गायब बची लगाम...
India Today Hindi
|October 01, 2025
अठारह साल पहले डकैतों से निबट चुका मध्य प्रदेश का चंबल क्षेत्र, अब भी जारी उन्हें काबू करने वाला ऐंटी डकैती ऐक्ट किनको निबटा रहा है?
अपनी चार साल की बेटी का हाथ थामे बैठे रामसेवक को देखते हैं तो कुछ भरोसे जैसा दिखता है. बच्ची का भरोसा, कि पिता ने हाथ थाम रखा है. लेकिन इस दृश्य में भरोसा दूसरी तरह से बरता गया है. रामसेवक को भरोसा है कि किसी ने हाथ थाम रखा है. साल 2022 के नवंबर महीने में रामसेवक को मध्य प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेजा. जेल में महीनों गुजारने के बाद जमानत पर जो लौटे, तो रामसेवक अंधेरा होते ही अकेले होने से घबराते हैं. किसी का भरोसा चाहिए होता है.
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर जरदान सिंह का पुरा गांव तक आजादी के इतने दशकों बाद भी पक्की सड़क नहीं पहुंची. मिट्टी के ढूहों और पेड़ों के बीच से निकलती सड़क जैसी जो दिखाई देती है वह चंबल के जीवटता की लकीर है, जो बारिश के बाद मुश्किल से पैदल चलने लायक बची है. इसी रास्ते कई किलोमीटर पैदल चलकर जरदान सिंह का पुरा पहुंची इंडिया टुडे के सामने रामसेवक कई घंटे चुप्पी साधे बैठे रहते हैं.
मध्य प्रदेश पुलिस ने 3 नवंबर, 2022 को रामसेवक और इसी गांव के रिंकू को 'मध्य प्रदेश डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981' की धारा 11,13 के तहत गिरफ्तार किया. स्पेशल कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में पुलिस ने लिखा कि इन दोनों को जंगल में रोक कर तलाशी ली गई तो इनके पास "एक शंकर बीड़ी का पैकेट, दो माचिस के पैकेट, पांच राजश्री, दस लखपति तंबाकू की पुड़िया" मिली. रामसेवक के साथी के पास से "दो किलो आटा, एक किलो चावल, एक नमक की थैली और एक किलो अरहर की दाल" जब्त की गई. आरोप था कि ये सामान इनामी बदमाश गुड्डा गुर्जर को पहुंचाने के 'इरादे से' खरीदा गया था. यह आरोप लगते ही रामसेवक और रिंकू एक ऐसे कानून की जद में आ जाते हैं जिसकी एक धारा 'डकैतों को आश्रय देने या जरूरत का सामान पहुंचाने को गंभीर अपराध' घोषित करती है.
This story is from the October 01, 2025 edition of India Today Hindi.
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