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घर से काम करना बेहतर या ऑफिस में
Mukta
|August 2023
बदलती जीवनशैली ने कामकाज के तौरतरीकों को बदल दिया है, जिस से दफ्तर की 9 से 5 वाली जौब अब वर्क फ़ौम होने लगी है. चर्चा अब इस बात की है कि आने वाले समय में कार्यशैली कैसी होगी.
कोरोना के बाद से भारत समेत पूरी दुनिया में लोगों के काम करने के तौरतरीके में बदलाव आया है. आज यह सुविधा है कि आप रिमोट वर्क कर सकते हैं यानी औफिस जाने की जरूरत नहीं, बस घर पर अपने सिस्टम को लौगइन करो और सारा काम घर बैठेबैठे.
नोएडा, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई, चैन्नई जैसे बड़े शहरों के कौर्पोरेट इसी तरह अपने कर्मचारियों से काम करवा रहे हैं. आजकल की युवा पीढ़ी इसे सहूलियत मान रही है क्योंकि इस में फौरमैलिटी है. आप चाहे अपने नोटिस एरिया में हैं, परिवार के साथ गपशप कर रहे हैं, जब चाहे उठ कर चाय पी रहे हैं पर साथ में काम भी कर रहे हैं.
वर्क फ़ौम होम में किसी तरह की फौरमैलिटी नहीं है कि आप को कैसे रहना है. आप बस काम कर रहे हैं, कंपनी को यह मैटर करता है.
लेकिन जहां यह सहूलियत देता है वहीं इसे ले कर कुछ समस्याएं भी हैं जैसे सोशल रिलेशन खत्म होना, पूरे दिन घर में बंधे रहना, काम के घंटे फिक्स न होना और सब से बड़ी बात वर्क एथिक का खत्म होना. ऐसे में युवाओं में असमंजस है कि उन के लिए घर में काम करना बेहतर है या औफिस में.
हम चाहे जितनी दुहाई दें कि यह कंप्यूटर और इंटरनैट का युग है, लेकिन समाज में हमारे दकियानूसी होने के चिह्न अब भी हर तरफ बिखरे हैं.
भले हम अपनी जीवनशैली में फायदे के लिए आधुनिक तकनीक का भी खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हम सोच और समझ के मामले में आधुनिकता को कहीं जगह नहीं देते. यही कारण है कि आज जबकि सेवा क्षेत्र का 90 फीसदी से ज्यादा काम औनलाइन हो चुका है और 80 फीसदी सेवा क्षेत्र के प्रोफैशनलों के लिए लैपटौप ही उन का दफ्तर बन चुका है, हिंदुस्तान में जो पुरुष सुबह घर से निकल कर एक तयशुदा जगह काम करने नहीं जाता, उसे इज्जत की निगाह से नहीं देखा जाता.
This story is from the August 2023 edition of Mukta.
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