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"हमने फिल्म 'डबल एक्स एल' में कहा है कि सपनों को पूरा करने के लिए आपको किसी साइज में फिट होना आवश्यक नही है..." -सतराम रमानी, निर्देशक फिल्म "डबल एक्स एल"
Mayapuri
|Mayapuri Digital Edition 136
हमारे समाज में बॉडीशेमिंग एक बहुत बड़ा मुद्दा है मोटी लड़की को हर कोई टोल करता रहता है. कुछ लड़कियों को लगता है कि उनका मोटापा उनके सपनों को पूरा करने की राह में बाधक है.
इसी मुददे पर 'हेलमेट' फेम निर्देशक सतराम रमानी फिल्म "डबल एक्स एल" लेकर आए हैं. 4 नवंबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली इस फिल्म में हुमा कुरेशी, सोनाक्षी सिन्हा, महंत राघवेंद्र, जहीर इकबाल के अलावा कैमियो किरदार में क्रिकेटर शिखर धवन हैं.
प्रस्तुत है सतराम रमानी से हुई एक्सक्लूसिब बातचीत के अंश...
फिल्मों से जुड़ने का ख्याल कैसे आया? क्या आपके घर में फिल्म का माहौल रहा है? - जी नहीं... मेरी परवरिश कला के माहौल में नही हुई है, मेरे घर का कोई भी सदस्य फिल्म इंडस्ट्री से नहीं जुड़ा हुआ है. मैं सिंधी समुदाय से हूँ. मेरे पिता का बिजनेस है. लेकिन मेरे पिता जी का थिएटर की तरफ काफी झुकाव रहा है तो वह मुझे बचपन से ही मराठी थिएटर देखने के लिए ले जाया करते थे. जिसके चलते मेरे अंदर थिएटर यानी नाटक देखने और कुछ सीखने की इच्छा बलवती होती रही है. मुझे हर नाटक में एक नया किएशन देखकर अच्छा लगता था. तो मेरा प्रेरणास्रोत कहीं न कहीं थिएटर ही रहा.
अक्सर देखा जाता है कि थिएटर के शौकीन थिएटर तक ही सीमित रह जाते हैं. ऐसे में फिल्मों से जुड़ने का ख्याल कैसे आया?
- देखिए, मेरा बचपन जलगांव, महाराष्ट्र में बीता. वहां पर सिनेमा का एक्सपोजर नही रहा. वहां पर तो मराठी थिएटर का ही एक्सपोजर रहा है. लेकिन कालेज दिनों में मैने एक अखबार में फिल्म मेकिंग पर एक लेख पढ़ा था, जिसे मैने काटकर अपने पास रख लिया था. इसकी मूल वजह यह है कि मुझे हमेशा अलग अलग तरह का सिनेमा आकर्षित करता रहा है. मैने टीवी पर और सिनेमाघरों में ब्लैक में टिकट लेकर फिल्में देखी हैं. सिनेमा का अपना एक जादू रहा है. तो कहीं न कहीं थिएटर व सिनेमा दोनों का असर मेरी परवरिश में रहा.
क्या आपने फिल्म निर्देशन की कोई ट्रेनिंग भी हासिल की?
- जी हॉ... मैने पुणे के एमआई टी कॉलेज, जहां फिल्म मेकिंग का कोर्स होता है, से मैने फिल्म मेकिंग सीखी.
एमआई टी में फिल्म मेकिंग की ट्रेनिंग के अनुभव क्या रहे?
This story is from the Mayapuri Digital Edition 136 edition of Mayapuri.
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