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धान में पोषक तत्वों खाद एवं उर्वरक का महत्व

Modern Kheti - Hindi

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15th June 2025

धान में पोषक तत्वों का महत्व - धान की अधिक पैदावार के लिये एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एक महत्वपूर्ण उपाय हैं, जिसमें रासायनिक उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक उर्वरक, हरी-नीली शैवाल, गोबर की खाद एवं हरी खाद आदि का समुचित उपयोग किया जाता है।

धान में पोषक तत्वों खाद एवं उर्वरक का महत्व

धान के उत्पादन में मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन (नत्रजन), फास्फोरस (स्फुर), पोटाश, जिंक (जस्ता) आदि महत्वपूर्ण हैं जिनकी भरपाई किसानों द्वारा रासायनिक उर्वरकों की मदद से की जाती है, किंतु एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन सभी प्रकार के आदानों को आवश्यकतानुसार उपयोग को बढ़ावा देता है। मृदा के स्वास्थ्य को बनाये रखने, मृदा की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने एवं लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाने के लिये एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का सबसे पहला सिद्धांत यह है। फसल लेने के पूर्व मृदा प्रयोगशाला में मृदा की जांच करवाई जाये ताकि जांच की रिपोर्ट के आधार पर मृदा में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त हो सके, जिसके आधार पर पोषक तत्वों की सही मात्रा खेत में डाली जा सके। अपितु सामान्य तौर पर किसान भाई अपनी मृदा की जांच नहीं करवाते हैं। अतः धान की फसल के लिये 80-100 किलो/हैक्टेयर नाइट्रोजन, 50-60 किलो/हैक्टेयर फास्फोरस एवं 30-50 किलो/हैक्टेयर पोटाश की मात्रा की सिफारिश की जाती है। खेत तैयार करते समय खेत में सड़ी हुई गोबर खाद अथवा कम्पोस्ट खाद का 10-12 टन प्रयोग किया जाये तो इससे नाइट्रोजन का अधिक उपयोग हो पाता है एवं पोषक तत्व प्राप्त होने के साथ-साथ मृदा का भौतिक स्तर में भी सुधार होता है।

नाइट्रोजन

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