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कपास में जल का सही उपयोग अच्छी उपज में देगा सहयोग

Modern Kheti - Hindi

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1st April 2025

कपास एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, जिसमें जल की आपूर्ति का बेहद अहम महत्व है। लेकिन जल की बढ़ती कमी सूखा प्रभावित क्षेत्रों में एक बड़ी समस्या बन गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में पहले ही जल की उपलब्धता बहुत सीमित है।

- रवीना यादव, शुभम लाम्बा, कर्मल सिंह मालिक, संदीप कुमार, मीनाक्षी जाटाण, सोमवीर, शिवानी मंधानिया और दीपक कुमार कपास अनुभाग, चौ चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

कपास में जल का सही उपयोग अच्छी उपज में देगा सहयोग

इन क्षेत्रों में उपलब्ध जल का 70 प्रतिशत हिस्सा कृषि में उपयोग होता है और इसी कारण से अन्य कार्यों जैसे औद्योगिक और घरेलू उपयोग के लिए जल बहुत कम मात्रा में उपलब्ध हो पाता है। इस बढ़ती समस्या को देखते हुए हमें कुछ ऐसे उपाय ढूंढने होंगे, जिससे न केवल जल का संरक्षण हो सके, बल्कि हमारी खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता भी बनी रहे।

हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहां कृषि की अधिकांश गतिविधियां सिंचाई पर निर्भर हैं, वहां जल की कमी सीधे उत्पादकता पर असर डालती है। इसलिए इन क्षेत्रों में जल का संरक्षण बहुत जरूरी है। कपास, जो एक नकदी फसल है, किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन पानी की कमी से यह सीधे प्रभावित होती है। इसलिए यदि हमें कपास की पैदावार बढ़ानी है, तो हमें ऐसी विधियां अपनानी होंगी, जिससे जल का संरक्षण हो सके। एक ऐसी विधि है, ड्रिप इरिगेशन या टपका विधि, जिसमें बूंदबूंद करके पानी सीधे पौधे की जड़ में पहुंचाया जाता है।

कपास की खेती में जल उपयोग दक्षता का महत्व

जल उपयोग दक्षता का मतलब है जल का कुशलतापूर्वक उपयोग, अर्थात कम पानी का उपयोग करते हुए बेहतर पैदावार प्राप्त करना। अगर हम कपास की फसल में जल दक्षता को बढ़ावा देते हैं, तो न केवल जल संसाधनों पर दबाव कम होगा, बल्कि फसल उत्पादकता भी सुधरेगी। पारंपरिक सिंचाई विधियां, जैसे जल भराव सिंचाई, जल के अपव्यय का मुख्य कारण हैं, क्योंकि इनमें जल वाष्पीकरण, सतही बहाव एवं भूमिगत रिसाव आदि से पानी का बहुत बड़ा हिस्सा बर्बाद होता है। अत: हम यह कह सकते हैं कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में ये विधियां जल संकट को और बढ़ाती हैं।

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