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मक्के की फसल में रोग प्रतिरोधकता के लिए नये बैक्टीरिया मिले
Modern Kheti - Hindi
|15th August 2024
ब्रेवीबैक्टीरियम ने फफूंद से संक्रमित मक्के के पौधों में बीमारी को कम करने में मदद की। साथ ही इसके साथ अन्य जीवाणुओं ने विशिष्ट जीन और अणुओं को सक्रिय करके पौधों की प्रतिरक्षा को मजबूत बनाने में मदद की।
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भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किए एक नए अध्ययन से पता चला है कि चाय के पौधों की जड़ों के आसपास पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी यानी राइजोस्फीयर में मौजूद कुछ बैक्टीरिया मक्के को बेहतर तरीके से बढ़ने में मददगार हो सकते हैं।
इतना ही नहीं, यह बैक्टीरिया मक्के की रोग संबंधी कोशिकीय तनाव का प्रतिरोध करने की क्षमता को भी बढ़ा सकते हैं। ऐसे में इन सूक्ष्म जीवों का उपयोग फसलों में पर्यावरण अनुकूल जैव उर्वरक के रूप में किया जा सकता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक इन जीवाणुओं को पादप वृद्धि संवर्धक राइजोस्फीयर (पीजीपीआर) उपभेदों के रूप में जाना जाता है। इनका उपयोग फसलों की पैदावार को बढ़ाने के लिए प्रभावी जैव उर्वरक के रूप में किया जा सकता है।
This story is from the 15th August 2024 edition of Modern Kheti - Hindi.
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