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ड्रिप सिंचाई प्रणाली का निर्माण एवं रखरखाव
Modern Kheti - Hindi
|15th May 2024
फसल का उत्पादन बढ़ाने में ड्रिप सिंचाई की अहम भूमिका है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली से काम लेने के लिए यह आवश्यक है कि इसका रखरखाव अच्छे तरीके से किया जाये। बागवानी फसलों में पौधे से पौधे की दूरी अधिक होने के कारण ऑनलाइन लेटरल पाईपें और ड्रिपर का प्रयोग किया जाता है। यदि क्षेत्र आवारा पशुओं से सुरक्षित है और फसल में पौधे से पौधे की दूरी निश्चित है तो इन लाईन लेटरल का प्रयोग किया जाता है। यदि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऊँची नीची है तो ऑनलाइन या इनलाइन लेटरल में प्रेशर कम्पनसैटिंग ड्रिपर का प्रयोग किया जाता है।
ड्रिप लगाने के उपरांत ड्रिप सैट की सांभ-संभाल एवं रखरखाव :
ड्रिप लगाने के उपरांत लेटरल के अंत में बीच वाले एंड कैप को खोल कर पानी 5 से 10 मिनट के लिए खुला चला कर देखना चाहिए जिससे लेटरल में मौजूद कोई गंदगी खुले पानी के साथ बाहर निकल जाये। यदि चलाते समय ड्रिपर या किसी जोड़ से पानी की लीकेज महसूस हो तो उस हिस्से की तुरंत बदली कर दी जानी चाहिए। हर ड्रिपर या इमीटर से यह नोट करें कि पानी बाकी ड्रिपर या इमीटर के बराबर निकले। इसलिए अलग-अलग ड्रिपर के नीचे खुले बर्तन रखकर प्रणाली को 5 मिनट चला कर इन बर्तनों में इकट्ठा हुए पानी को देखकर अनुमान लगायें कि हर बर्तन में पानी एक ही मात्रा में हो। यदि अंतर दिखाई दे तो संबंधित ड्रिपर को बदल दें। इस तरह करने से सभी खेत में एकसमान पानी लगेगा।
ड्रिप व्यवस्था में फिलटरों का रखरखाव :
हाईड्रोसाइक्लोन और डिस्क फिल्टर का प्रयोग ट्यूबवैल के पानी में घुली हुई रेत को साफ करने के लिए सैकेंडरी फिल्टर के तौर पर इस्तेमाल किये जाते हैं। पानी में गन्दगी को साफ करने के लिए बैकवाशिंग की व्यवस्था भी प्रणाली में की जाती है। फिलटरों के प्रवेश और निकासी द्वार पर दबाव प्रतिदिन चैक करते रहो । रेत वाले फिल्टर की बैंक वाशिंग प्रतिदिन करें। सैंड फिल्टर के प्रवेश और निकासी द्वार पर दबाव का अंतर 0.3 किलोग्राम प्रति वर्ग सैंटीमीटर एवं स्क्रीन फिल्टर पर अंतर 0.2 किलोग्राम प्रति वर्ग सैं. मी. से अधिक न हो।
ड्रिपर या इमीटर का बंद होना :
ड्रिपर या इमीटर का बंद या चोक होना सामान्य समस्या है। ड्रिपर चोक होने से पानी एकसमान नहीं लगेगा और उत्पादन प्रभावित होगा। यह देखा गया है कि ड्रिपर आमतौर पर बारिश या बारिश के समय दौरान बंद या चोक हो जाते हैं जब खेतों में बारिश पड़ते समय पानी ठहर जाता है। दूषित पानी ड्रिपर में घुस जाता है और ड्रिपर चोक हो जाते हैं। कई बारी फिल्टर व्यवस्था में नुक्स पड़ने से भी इमीटर चोक हो जाते हैं। परन्तु चोकिंग से निजात पाने के लिए तेजाब और क्लोरीन का प्रयोग किया जाता है। समय- समय पर प्रणाली की फ्लशिंग करते रहने से भी चोकिंग से राहत मिलती है। ड्रिप प्रणाली के सही चलने के लिए समय-समय पर चोकिंग का निरीक्षण करते रहें।
This story is from the 15th May 2024 edition of Modern Kheti - Hindi.
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