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कृषि संकट को अलग संदर्भ से समझने की आवश्यकता...
Modern Kheti - Hindi
|1st February 2024
पंजाब के कृषि संकट को समझने के लिए इसको केवल कृषि संकट नहीं कहा जा सकता और इसको सिर्फ गाँव या पंजाब तक सीमित करके नहीं समझा जा सकता। यह संकट सिर्फ कृषि का संकट भी नहीं है। यह विश्वी पूंजी की गिरफ्त में आई कम विकसित आर्थिकताओं के संकट का एक दिखावा है। यह भी समझना गलत है कि यह सिर्फ पंजाब की किसानी से जुड़े लोगों का संकट है और बाकी की श्रेणियों के लोग इससे अछूते रह जाएंगे।
पंजाब की आर्थिकता अपने पारंपिरक कृषि प्रधान मॉडल से दूर हटती हुई लगातार ऐसी आर्थिकता बनती जा रही है, जिसकी निर्भरता कृषि उत्पादन की जगह उत्पादकता के अन्य क्षेत्रों पर बढ़ रही है। पंजाब की जी. डी. पी. में कृषि उत्पादन के हिस्से में कमी दर्ज की जा रही है। कृषि पर निर्भरता घटने को एवं कुल राज्य घरेलू उत्पादन में उद्योग एवं सेवाओं के योगदान के बढ़ने को यद्यपि आर्थिक विकास के लिए हांमुखी रुझान माना जाता है, परन्तु पंजाब की बहुसंख्यक जनसंख्या का कृषि उत्पादन में लगे होना बताता है कि यह रुझान कोई बहुत से सार्थक सामाजिक निष्कर्ष पैदा करने की जगह, पंजाबी मजदूर शक्ति की कम उत्पादकता का लक्षण भी है। यानि कुल राज्य घरेलू उत्पादन में यद्यपि कृषि उत्पादों का योगदान घट रहा है, परन्तु इस क्षेत्र में लगी मजदूर शक्ति अधिक संख्या में कृषि उत्पादन को छोड़ कर बदलवें रास्तों पर नहीं जा रही। पंजाब के लोगों के पास उत्पादकता के अन्य क्षेत्रों में जज्ब होने के बहुत से अवसर नहीं हैं। कृषि आधारित उद्योग की गैर मौजूदगी में पंजाब के ग्रामीण लोग शिक्षा एवं रोजगार के और रूपों के द्वारा आर्थिक विकास के रास्ते चल सकते हैं, परन्तु आज के निजीकरण के युग में सरकारी क्षेत्र के रोजगार में भी कमी आ रही है।

This story is from the 1st February 2024 edition of Modern Kheti - Hindi.
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