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अच्छे उत्पादन हेतु समन्वित पादप पोषक तत्व प्रबंधन
Modern Kheti - Hindi
|1st August 2023
धान व गेहूं के फसल चक्र में ढेंचे की हरी खाद का प्रयोग करें। फसल चक्र में परिवर्तन करें। उपलब्धता के आधार पर गोबर तथा कूड़ा करकट का कम्पोस्ट बनाकर प्रयोग किया जाये। खेत में फसल के अवशिष्ट जैविक पदार्थों को मिट्टी में मिला दिया जाये।
सदियों से भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाये रखने के लिए किसान किसी न किसी रूप में पोषक तत्वों का प्रयोग करता आ रहा है। उर्वरकों के प्रचलन से पहले खेतों में गोबर व हरी खाद का प्रयोग होता था। परन्तु आजकल सघन पद्धति अपनाने के कारण फसल चक्रों में कार्बनिक खादों का प्रयोग नहीं हो पा रहा है। किसान यह आशा करता है कि उसकी जोत के सम्पूर्ण क्षेत्र में गुणवत्ता वाली अधिक से अधिक उपज प्राप्त हो। पहले जब रासायनिक उर्वरक उपलब्ध नहीं थे। खेती में जैविक खादों का प्रयोग मुख्य रूप से किया जाता था जिससे कृषि उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाता था परन्तु 60 के दशक में जब हरित क्रांति का उद्भव हुआ उर्वरकों का प्रयोग धीरे-धीरे बढ़ता गया जिससे उत्पादन में आशातीत वृद्धि दर्ज की गई। प्रारम्भ में प्रमुख पोषक तत्वों में केवल नत्रजन युक्त उर्वरकों का प्रयोग हुआ लेकिन धीरे-धीरे फास्फेटिक एवं पोटेशिक उर्वरकों के महत्व को समझते हुए इनका प्रयोग भी होने लगा परन्तु अन्य आवश्यक पोषक तत्वों जैसे मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैगनीज, मालिब्डेनम, बेरॉन एवं क्लोरीन की मिट्टी में कमी होती रही, फलस्वरूप इन तत्वों का पौधों की आवश्यकतानुसार उपलब्धता न होने से अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन में हो रही लग
This story is from the 1st August 2023 edition of Modern Kheti - Hindi.
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