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सेवा क्षेत्र में बढ़ाना होगा निर्यात का दायरा

Business Standard - Hindi

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December 23, 2025

सेवा क्षेत्र में कुछ खास श्रेणियों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए यात्रा, वेलनेस और वित्तीय सेवाओं को बढ़ावा देना आवश्यक है। बता रहे हैं धर्मकीर्ति जोशी, आशिष वर्मा और भवि शाह

वैश्विक सेवाओं का निर्यात वर्ष 2014 से औसतन 6.1 फीसदी की सालाना दर से बढ़कर 2024 में 8.6 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया।

इसी अवधि में वैश्विक वस्तुओं का निर्यात 2.9 फीसदी की दर से बढ़कर 24.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। इस तेजी की वजह क्या रही है? कुल वैश्विक निर्यात में सेवाओं का अनुपात 500 आधार अंक बढ़ कर 27 फीसदी हो गया जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला, खासकर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार में वृद्धि हुई।

वर्ष 2022 में प्रकाशित विश्व बैंक के एक ब्लॉग के मुताबिक 2005 और 2018 के बीच प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के एक नमूने में सेवा निर्यात ने 1.6 करोड़ नए रोजगार सृजित किए जबकि वस्तुओं के निर्यात से उत्पन्न रोजगार में 3.1 करोड़ की कमी दर्ज हुई। आधुनिक विनिर्माण में पूंजी-गहन उत्पादन और उच्च कुशल श्रम शक्ति पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए हाल के वर्षों में यह रुझान जारी रहने के आसार हैं।

इस माहौल में भारत की सेवा निर्यात की चाल असाधारण रही है। उदाहरण के लिए पिछले दशक में वैश्विक स्तर पर वस्तुओं के कुल निर्यात में भारत का हिस्सा केवल 1.8 फीसदी था और यह 18वें स्थान पर था (इसकी तुलना में चीन पहले स्थान पर)। मगर वैश्विक स्तर पर सेवाओं के निर्यात में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2014 में 3 फीसदी से बढ़कर 2024 में 4.2 फीसदी हो गई। इस तरह भारत की सेवा निर्यात वृद्धि दर 9.1 फीसदी है जबकि वैश्विक स्तर पर यह दर 6.1 फीसदी रही है। यह उपलब्धि भारत को 2024 में दुनिया का आठवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक बनाती है और भारत से आगे रहने वाला एकमात्र विकासशील देश चीन ही है।

भारत से होने वाले कुल निर्यात में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई है। अमेरिका द्वारा शुल्क लगाए जाने के बाद वस्तुओं के व्यापार की तुलना में सेवा निर्यात कम प्रभावित हुए हैं, जिससे मौजूदा उथल-पुथल से निपटने में मदद मिली है। एक दशक पहले सेवाओं का हमारे कुल निर्यात में केवल 30 फीसदी हिस्सा होता था।

सेवा निर्यात की संरचना में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। हाल के वर्षों में अन्य व्यावसायिक सेवाएं (ओबीएस) खंड वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बनकर उभरा है। कोविड महामारी से पहले यात्रा सेवाओं की हिस्सेदारी अधिक हुआ करती थी।

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