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छोटों को भी दें मान-सम्मान!
Sadhana Path
|January 2026
हर एक व्यक्ति को एक दूसरे की सोच, भावनाओं और व्यवहार का सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने पर आप अपने से छोटों के लिए एक बेहतर उदाहरण पेश करेंगे और स्वयं भी उचित आदर पाएंगे।
हम सभी ने बचपन में अपने माता पिता और शिक्षकों से सीखा है कि अपने से बड़े लोगों का सम्मान करना चाहिए। भारतीय संस्कृति में अपने से उम्र या ओहदे में बड़े व्यक्ति को एक उच्च स्थान देने व उनका सम्मान करने को ख़ास महत्व दिया गया है। हमारे वैदिक और पौराणिक साहित्य में इसके अनेक उदाहरण हैं। चाहे वह हनुमान की राम भक्ति हो या अर्जुन का श्री कृष्ण पर अपार विश्वास या गुरुकुल प्रथा में गुरु के कहने पर बिना प्रश्न किए बड़ी-से-बड़ी चुनौतियों का सामना करने वाले शिष्य, हम सभी इन प्रभावी कहानियों को सुन के बड़े हुए हैं।
परन्तु क्या कभी आपने ये सोचा है कि हर व्यक्ति को सम्मान का समान हक़ है। व्यक्ति चाहे किसी भी जाति, लिंग या उम्र का हो, उसे सम्मान प्राप्त करने का पूरा हक़ है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अपने बड़ों के अलावा, हमें अपने छोटों को भी सम्मान देना चाहिए। वास्तव में सम्मान उम्र पर निर्भर नहीं होता। हर एक व्यक्ति को एक दूसरे की सोच, भावनाओं और व्यवहार का सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने पर आप अपने से छोटों के लिए एक बेहतर उदाहरण पेश करेंगे और स्वयं भी उचित आदर पाएंगे। हमें अपनी सोच, आदत या अहंकार के कारण छोटों को सम्मान देने में परेशानी होती है। कुछ साधारण बातों का अनुसरण कर के हम ये परेशानी कम कर सकते हैं।
उचित सम्बोधन दें
बच्चों या अपने से छोटी उम्र के व्यक्तियों को कभी 'तू' कहकर सम्बोधित न करें। उन्हें हमेशा 'तुम' या 'आप' कहकर बुलाएं। अपने कार्य स्थल पर, अपने सहकर्मियों व अपने अधीन कर्मचारियों के नाम के आगे 'जी' लगाकर सम्बोधित करें। महिलाएं भी घर में काम करने वाले सहायकों को 'भैया', 'दीदी' या नाम के आगे 'जी' लगाकर पुकारें। इसके अलावा छोटों से भी ऊंची आवाज़ में बात न करें, बात करते हुए 'प्लीज', 'थैंक यू' और 'सॉरी' जैसे शब्दों का यथोचित उपयोग करें। अपशब्दों से बचें व उचित शब्दों का चयन कर अपने बड़प्पन की गरिमा बनाये रखें। जिस घर में बड़े सबको उचित सम्बोधन देंगे, वहां छोटे भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
बात ध्यानपूर्वक सुनें
Diese Geschichte stammt aus der January 2026-Ausgabe von Sadhana Path.
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