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रामनगर की रामलीला

Sadhana Path

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September 2025

आज रामलीला के मंचन में काफी बदलाव हुआ है। रामलीलाएं आज जहां आधुनिक हुई हैं, वहीं पर वाराणसी में रामनगर की रामलीला आज भी अपने पुराने रूप में कायम हैं। आइए जानें राम नगर की रामलीला की कहानी।

- - अनुज श्रीवास्तव

रामनगर की रामलीला

रामलीला भारत की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है, प्राचीन समय से रामलीला का मंचन भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में होता रहा है। रामलीला की अगर बात करें और काशी की रामनगर लीला की बात न हो ऐसा तो हो ही नहीं सकता। रामनगर की रामलीला भारत की सबसे प्राचीन रामलीलाओं में से एक है।

धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के रामनगर में दो सौ साल पुरानी रामलीला में आज भी प्राचीन परंपराओं का पालन होता है। गंगा किनारे बसा रामनगर रामनवमी के अवसर पर पूरी तरह से राममय हो जाता है। अध्यात्म के रस में पूरी तरह डूबे इस नगर की शोभा देखते ही बनती है, श्रद्धा-भक्ति एवं समर्पण का ऐसा दुर्लभ वातावरण अन्यत्र देखने को नहीं मिलता। रामलीला में रामचरितमानस के अनुसार भगवान श्रीराम के जीवन की लीला का मंचन होता है।

आज एक ओर जहां रामलीलाएं आधुनिक हुई हैं। रामलीलाओं के मंचन में काफी बदलाव आया है। लाइट्स साउंड का इस्तेमाल खूब बढ़ा है। रामलीलाएं पूरी तरह से हाईटैक हुई हैं। वहीं रामनगर की रामलीला की सबसे खास बात यह है की आज भी यहां रामलीला में बिजली की रोशनी एवं लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं होता और न ही भड़कीले वस्त्र तथा आभूषण का प्रयोग होता है। यह रामलीला आज भी उसी अंदाज में होती है और यही इसे और जगह होने वाली रामलीला से अलग करता है।

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