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सौहार्द का प्रतीक पावन होली
Sadhana Path
|March 2024
होली का रंगीन उत्सव भी केवल मावे की महंगी गुझिया या फागुनी दावतों तक सीमित नहीं है। पर्व के रूप में होली एक ऐसा सतरंगी आयोजन है।
भारतीय उत्सवों और त्यौहारों के मूल में कुदरत के लिए अगाध के प्रेम तथा आनंद समाहित है। त्यौहार तो यों भी हमारी जीवन शैली का आवश्यक अंग रहे हैं। हरियाली और मौसम से जुड़े हमारे सभी बारह मासी त्यौहार इतने अनूठे हैं कि इसी कारण विदेशी सैलानी भी भारतीय पर्व का उल्लास देखने खिंचे-खिंचे चले आते हैं। कितने ही पर्यटक उत्साह में भरकर, भारतीय परिधान पहनकर वैसा ही गीत-संगीत गुनगुनाकर खुशी-खुशी पर्व का हिस्सा भी बनते है। उत्सव और त्यौहार ऐसे टॉनिक होते हैं जो हमारे मन को खुराक देकर जीवन को सुंदर बना देते हैं। किसी दार्शनिक ने कहा है कि आनंद और हंसी-खुशी नाच के बिना मानव समाज अधिक दिन रह भी नहीं सकता। एक शोध किया गया जिसमें यह प्रमाणित हुआ कि उत्सवधर्मी लोग हमेशा सकारात्मक होते हैं न इसलिए ये न केवल अच्छी सेहत पाते है बल्कि एक खुशहाल और लंबा जीवन भी जीते हैं। त्यौहारों से जुड़ी एक कहानी भी अक्सर ही कही जाती है कि अब पर्व की तैयारी है इसलिए किसी को अकेला मत रहने दो सबको न्यौता दो सबको बुलाओ सबके साथ नये या धुले परिधान पहन लो। बस्ती का कोई कोना नाच गाने से बचा न रहे।
Diese Geschichte stammt aus der March 2024-Ausgabe von Sadhana Path.
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