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दो जासूस
Champak - Hindi
|January Second 2025
एक सुबह, निखिल और अखिल के पापा पार्क में टहलने के बाद उदास हो कर घर लौटे.
“अब तो हद ही हो गई है,” उन्होंने चाय की चुस्की लेते हुए कहा, “अब तो दिनदहाड़े चोरियां होने लगी हैं.”
“चोरी कहां हुई है?” मां ने पूछा.
“यह घटना कल पड़ोस वाली कौलोनी के एक घर में हुई. सभी घरवाले पहाड़ों पर छुट्टियां मनाने गए थे. सामने का दरवाजा बंद था. चोर पीछे की खिड़की तोड़ कर अंदर घुसे और दिनदहाड़े कीमती सामान चुरा कर ले गए.”
मां ने कहा, “ठंड के दिनों में हर कोई अपने घरों में हीटर जला कर अंदर रहता है, इसीलिए चोरों को यह बात पता है और वे दिनदहाड़े चोरी करने से नहीं डरते.”
“तुम्हारे चाचा कहां हैं?” पापा ने बच्चों से पूछा. उन के चाचा शहर में थे और दोनों बच्चे उन से बहुत प्यार करते थे.
अखिल ने उत्तर दिया, “वह जल्द ही यहां पहुंच जाएंगे.”
“भैया, क्या आप को लगता है कि पुलिस चोरों को पकड़ लेगी?” अखिल ने चाय के बाद डाइनिंग टेबल पर बैठे अपने बड़े भाई निखिल से पूछा.
“देखते हैं. मैं ने अभी जो किताब पढ़ी है, उस में बच्चों ने पुलिस से पहले ही केस सुलझा लिया था,” निखिल ने सोचसमझ कर जवाब दिया.
अखिल की आंखें चौंधिया गईं. “क्या हमें खुद चोरों को पकड़ने की कोशिश करनी चाहिए?”
“चलो, एक बार कोशिश करते हैं,” निखिल ने जवाब दिया.
दोपहर को दोनों भाई उस घर में गए, जहां चोरी हुई थी और वहां ताकझांक करने लगे.“भैया, पुलिस ने तो पहले ही अच्छी तरह से जांच कर ली होगी. अब क्या मिलेगा?” अखिल ने पूछा.
निखिल ने उम्मीद से कहा, “हो सकता है कि हमें शायद कुछ ऐसा मिल जाए, जो पुलिस की नजरों से छूट गया हो.”
कुछ देर बाद अखिल ने माउथ फ्रेशनर का खाली पैकेट दिखाया. “शायद यह चोर ने ही फेंका होगा, हम इस का इस्तेमाल कर उसे ढूंढ़ सकते हैं,” उस ने कहा.
निखिल ने एक टूटी हुई चप्पल दिखाते हुए कहा, “मुझे यह उस झाड़ी के पास मिली थी. चोर ने भागते समय तोड़ कर फेंक दी होगी,” उस ने बताया.
बच्चों ने कुछ देर इधरउधर देखा, लेकिन उन्हें कोई और संदिग्ध वस्तु नहीं मिली.
जब वे जा रहे थे तो अखिल ने इशारा किया, “भैया, वह लंबा आदमी, जिस के लंबे बाल हैं और चेहरे पर एक तिल भी है, वह डरावना लग रहा है.”
Diese Geschichte stammt aus der January Second 2025-Ausgabe von Champak - Hindi.
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