रूप, जय और यश की अधिष्ठात्री माँ दुर्गा
Jyotish Sagar|October 2020
रूप, जय और यश की अधिष्ठात्री माँ दुर्गा
मान्यता है कि जिस समय मौसम परिवर्तन हो रहा हो, उस समय व्यक्ति को आहार, दिनचर्या तथा जीवन शैली को लेकर कुछ ऐसे नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि वह बदलते मौसम के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें।
डॉ.हनुमान प्रसाद उत्तम

चाहे वह चैत्र के नवरात्र हों (सर्दी के बाद गरमी की शुरुआत) अथवा शारदीय नवरात्र (वर्षा के बाद शीत का आगमन)। दोनों ही ऋतुओं के संधिकाल । इसलिए नवरात्र में न केवल विशेष पूजन, बल्कि व्रत, उपवास, ध्यान, पूजा आदि की ऐसी व्यवस्था की गई है कि ताकि नौ दिनों तक व्यक्ति आहार-विहार के साथ संयमित जीवन जीकर खुद को बदलते मौसम के अनुरूप बना लें।

शारदीय नवरात्र एक ऐसा अवसर है, जिसका आयोजन पूरे उत्तर भारत में समान रूप से विशेष उत्साह तथा भव्यता से किया जाता है। कहीं यह नवदुर्गा के पूजन के रूप में मनाया जाता है, तो कहीं दुर्गा पूजा के रूप में। नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन की परिणति दसवें दिन दशहरा या विजयादशमी के रूप में होती है।

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