يحاول ذهب - حر
कौन हो तुम सप्तपर्णी?
December 2024
|Aha Zindagi
प्रकृति की एक अनोखी देन है सप्तपर्णी। इसके सात पर्ण मानो किसी अदृश्य शक्ति के सात स्वरूपों का प्रतीक हैं और एक पुष्प के साथ मिलकर अष्टदल कमल की भांति हो जाते हैं। हर रात खिलने वाले इसके छोटे-छोटे फूल और उनकी सुगंध किसी सुवासित मधुर गीत तरह मन को आनंद विभोर कर देती है। सप्तपर्णी का वृक्ष न केवल प्रकृति के निकट लाता है, बल्कि उसके रहस्यमय सौंदर्य की अनुभूति भी कराता है।
संसार के अनेक रहस्यों में से कुछ कभी न समझ आने वाले होते हैं। संसारभर में फैली प्रकृति की लीला के कुछ अंश अपनी आंखों से देखते हैं और चकित भी होते हैं कि ऐसे रूप, रस, गंध से जिसे ईश्वर ने रचा हो वह भला उपेक्षित क्यों हो! चंपा का फूल और सप्तपर्णी ऐसे ही रहस्य की तरह हर बार आंखों के सामने आते हैं। झरता तो हरसिंगार भी है, लेकिन उसकी महत्ता अद्भुत है। उसमें सुगंध तीव्र नहीं है, किंतु जो शुभता, जो सौंदर्य, जो पवित्रता है वह कहीं और नहीं। वहीं, झरते हुए सप्तपर्णी में बहुत तीव्र मादक गंध है, उसके झरने में भी अपार सौंदर्य है, किंतु उसका झरना जैसे विलाप लगता है। चंपा भी सुगंधित है, किंतु कैसा शाप - न भ्रमर पास आता है, न शिव को अर्पित होता है। होती हैं प्रकृति में कुछ वस्तुएं बहुत सुंदर, कल्याणकारी, निरापद; किंतु उतनी ही शापित भी। अहल्या शापित हैं, कृष्ण शापित हैं, शालिग्राम भी, ब्रह्मा भी, इंद्र भी, चंद्र भी, दशरथ भी, नारद भी, शिव भी, नंदी भी, पार्वती भी, गणेश भी, गंगा भी, गायत्री भी, सुदामा भी, कर्ण भी, काम भी भी और स्वयं नारायण-लक्ष्मी भी, कौन बचा शाप से?
तो क्या कल्याणकारी जीवन का आवश्यक आभूषण है शाप? कर्मयोगियों के जीवन का शृंगार हो जाते हैं क्या शाप?
शापित हो या महान हो तुम!
शाप ही सौंदर्य बन जाए, या सौंदर्य ही शाप का कारण हो जाए, कौन जाने! सौंदर्यवान को ही तो नज़र लगती है, समर्थ को देखकर ही तो ईर्ष्या होती है, चांद को ही तो ग्रहण लगता है। जो अनचीन्हे हैं, सौंदर्यहीन हैं, गुणहीन हैं उन्हें क्या दृष्टि लगेगी और कोई क्यों उन्हें शापित करेगा। शापित भी तो महान ही होते हैं, महान बड़े कार्यों को करने वाले, सामर्थ्यवान गुणवान को ही शाप मिलते हैं। सुना है क्या कभी किसी दरिद्र को शाप दिया हो किसी ने, किसी वज्रमूर्ख पर पड़े हों शाप के छींटे!
शाप तो गुणवानों की शोभा बना, शक्तिसंपन्न, सौंदर्यवान, गुणवान, अध्यात्म, वैराग्य, चेतना के उच्चतम सोपानों पर स्थित आत्माएं ही अधिक शापग्रस्त हुईं। विश्व कल्याण के लिए नियमों में व्यतिक्रम का दंड भोगने को प्रस्तुत भी हुईं सहर्ष।
هذه القصة من طبعة December 2024 من Aha Zindagi.
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