يحاول ذهب - حر
पंचम सुर में राग बसंत
January 2026
|Aha Zindagi
बसंत पंचमी... एक ऐसा त्योहार जो हर साल लौटकर बस मौसम नहीं बदलता, दिल के भीतर दबे बचपन को भी जगा देता है।
मन उन यादों की पगडंडी से होकर अनायास गुजर जाता है जहां पीली धूप घरों में उतरती थी, आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें लहराती थीं, सरसों के खेत किसी कहानी की तरह लहलहाते थे, और स्कूल की सरस्वती पूजा ज़िम्मेदारी, आस्था और मासूम ख़ुशी का पहला स्वाद देती थी।
बड़े होते-होते ज़िंदगी के कई रंग बदल जाते हैं, लेकिन कुछ रंग ऐसे होते हैं जो उम्र के साथ फीके नहीं पड़ते। बसंत पंचमी मेरे लिए ऐसा ही एक रंग है- पीला, चमकीला, खुशबुओं से भरा, और बचपन की उन यादों से सजा हुआ, जिन्हें सोचते ही मन आज भी उसी मासूमियत में लौट जाता है। आज जब मैं अपने बच्चों को बसंत पंचमी की तैयारियां करते देखता हूं तो भीतर कहीं वह छोटा-सा 'मैं' फिर जाग उठता है... वही जिसके हाथ में पीली पतंग होती थी, जेब में मां के हाथों का बना मीठा और दिल में अजब-सी खुशी, जिसे शब्दों में बांधना मुश्किल है।
जब बसंती बयार में घुल गया परिवारهذه القصة من طبعة January 2026 من Aha Zindagi.
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